कोर्ट ने 23 सितंबर को डीएनए जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए सरकारी वकील को दो सप्ताह का समय दिया था। दाखिल किए गए अनुपालन हलफनामे में बताया गया कि विवेचना अधिकारी के फोरेंसिक साइंस लैबोरेट्री से संपर्क करने पर बताया गया कि उन्हें अब तक सैंपल ही प्राप्त नहीं हुआ है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगी गई जानकारी उपलब्ध न कराने और सरकारी वकील की ओर से अस्पष्ट हलफनामा दाखिल करने पर नाराजगी जताई। प्रमुख सचिव गृह को सात दिसंबर तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर शासकीय अधिवक्ता के आचरण तथा सरकारी वकील की अक्षमता का स्पष्टीकरण पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने रोहित की जमानत अर्जी पर दिया है।
विज्ञापन
कोर्ट ने 23 सितंबर को डीएनए जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए सरकारी वकील को दो सप्ताह का समय दिया था। दाखिल किए गए अनुपालन हलफनामे में बताया गया कि विवेचना अधिकारी के फोरेंसिक साइंस लैबोरेट्री से संपर्क करने पर बताया गया कि उन्हें अब तक सैंपल ही प्राप्त नहीं हुआ है। कोर्ट ने कहा, अपर शासकीय अधिवक्ता ने अस्पष्ट हलफनामा तैयार किया है।
शासकीय अधिवक्ता कार्यालय से पत्र कब भेजा गया, इसका कोई जिक्त्रस् नहीं है। कोर्ट ने कहा, अक्सर देखा गया है कि जानकारी उपलब्ध कराने के आदेश का पालन नहीं किया जाता और समय से मांगी गई जानकारी नहीं मिल पाती। इस पर प्रमुख सचिव गृह से सफाई मांगी गई है। सुनवाई सात दिसंबर को होगी।