चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
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पूर्व विधायक सईद अहमद को धोखाधड़ी मामले में स्पेशलकोर्ट एमपीएमएलए से राहत नहीं मिली है। स्पेशल कोर्ट ने उनके खिलाफ दाखिल आरोपपत्र पर कोर्ट के संज्ञान लेने के आदेश को निरस्त करने वाली अर्जी नामंजूर कर दी है। कोर्ट ने कहा कि अर्जी में कोई विधिक बल नहीं है, इसलिए यह खारिज होने योग्य है। मामले में पूर्व विधायक अभियुक्त हैं और उनके खिलाफ आरोप तय किया जा चुका है एवं प्रकरण साक्ष्य में लंबित है। यह आदेश स्पेशल जज पवन कुमार तिवारी ने एसपीओ हरि ओंकार सिंह, राधेकृष्ण मिश्र, लाल चंदन और एडीजीसी राजेश गुप्ता को सुनकर दिया है।
प्रकरण सिविल लाइंस थाने का है। अभियोजन की ओर से कहा गया कि पूर्व विधायक सईद अहमद के खिलाफ वादी सरदार जोगिंदर सिंह ने नौ जून 2014 को धोखे से जमीन हड़पने मुकदमा दर्ज कराया था। विवेचना के बाद पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। जिसे एसएसपी ने निरस्त कर अग्रिम विवेचना का आदेश दिया था। अग्रिम विवेचना के बाद सईद अहमद के खिलाफ पांच अक्तूबर 2016 को धोखाधड़ी की धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया गया। आरोपपत्र पर कोर्ट ने संज्ञान लेकर दर्ज रजिस्टर कर लिया। सईद अहमद की ओर से डिस्चार्ज किए जाने की अर्जी दी गई। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। बचाव पक्ष की ओर से दाखिल निगरानी खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका भी एक अगस्त 2017 को खारिज हो गई। प्रकरण में सीजेएम ने 22 अगस्त 2017 को आरोप तय कर दिया। सईद अहमद की ओर से अर्जी देकर कहा गया कि आरोपपत्र पर कोर्ट द्वारा लिया गया संज्ञान आदेश निरस्त किया जाए। बचाव पक्ष का तर्क था कि पत्रावली पर कथित इकरारनामा की प्रति संलग्न नहीं है। अभियोजन ने अर्जी का विरोध करते हुए कहा गया कि प्रकरण साक्ष्य में लंबित है। बचाव पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहा है।