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सामूहिक दुष्कर्म में पूर्व मंत्री गायत्री की जमानत नामंजूर

Sat, 13 Apr 2019 12:39 AM IST
विनोद सिंह News Desk, Amarujala, Prayagraj
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गायत्री प्रसाद प्रजापति - फोटो : amar ujala
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सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए ने जमानत पर रिहा करने से इंकार करते हुए उनकी जमानत अर्जी नामंजूर कर दी है। कोर्ट ने कहा कि अभियुक्त मुख्य आरोपी है। प्रकरण साक्ष्य में चल रहा है और अभियुक्त प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति है। वह गवाहों को प्रभावित और साक्ष्य से छेड़छाड़ कर सकता है। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने एसपीओ राधाकृष्ण मिश्र और एडीजीसी राजेश गुप्ता को सुनकर दिया है।
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घटना 2016 की लखनऊ के गौतम पल्ली थाने की है। पीड़िता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसे अशोक तिवारी के माध्यम से मंत्री गायत्री प्रजापति ने अपने गौतमपल्ली आवास पर बुलाया था। बालू खनन का काम दिलाने की बात की थी। चाय में नशीला पदार्थ मिला कर बेहोशी की हालत में उसके साथ मंत्री और अशोक ने दुष्कर्म किया। अश्लील फोटो निकाली और बार-बार बुलाकर दुष्कर्म करते रहे। वहां पर पिंटू सिंह, विकास वर्मा, आशीष शुक्ला, चंद्रपाल और रूपेश तिवारी ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया था। उसकी बच्ची के साथ भी दुष्कर्म करने का प्रयास किया गया, तब वह बर्दाश्त नहीं कर पाई। अभियुक्तगण द्वारा उसे और उसके परिवार को धमकी दी गई थी। बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि वादिनी ने गलत और फर्जी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अभियुक्त के विरुद्ध कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं दिया गया है।

ऐसे चला मामला
-जिला जज लखनऊ ने 25 अप्रैल 2017 को गायत्री की जमानत मंजूर की थी।
पीड़ित पक्ष इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर होने के आदेश पर रोक लगा दी। जिला न्यायालय को जमानत पर फिर से सुनवाई का आदेश दिया था।
-हाईकोर्ट के निर्देश पर जिला न्यायालय लखनऊ ने सुनवाई के बाद 27 सितंबर 2017 को गायत्री प्रसाद प्रजापति की जमानत निरस्त कर दी।
-हाईकोर्ट ने जिला जज लखनऊ के आदेश 27 सितंबर 2017 की पुष्टि की और 14 दिसंबर 2017 को जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
-हाईकोर्ट द्वारा जमानत निरस्त किए जाने के बाद अभियुक्त गायत्री प्रसाद प्रजापति की ओर से उच्चतम न्यायालय में एसएलपी दाखिल किया गया, जिसमें -उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया कि प्रकरण में  पीड़िता का बयान हो जाने पर अभियुक्त संबंधित कोर्ट में जमानत अर्जी प्रस्तुत कर याचना कर सकता है।
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-प्रकरण की सुनवाई स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए द्वारा की जा रही है। पीड़िता के बयान हो जाने के बाद अभियुक्त की ओर से यह जमानत अर्जी प्रस्तुत की गई थी।
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