इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर निवासी सुनने में दिव्यांग छात्रा काजल त्रिपाठी को दिव्यांगता आरक्षण के तहत एमबीबीएस में दाखिला देने की मांग पर हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने कहा कि अपीलीय मेडिकल बोर्ड और केजीएमयू, लखनऊ की रिपोर्ट छात्रा के खिलाफ है। ऐसे में याचिका में हस्तक्षेप का आधार नहीं है।
छात्रा ने नीट यूजी-2026 की परीक्षा दी थी। उसके यूडीआईडी प्रमाणपत्र में सुनने संबंधी स्थायी दिव्यांगता 40 प्रतिशत दर्ज थी। मेडिकल असेसमेंट बोर्ड ने दिव्यांगता 13.16 प्रतिशत आंकी, जबकि अपीलीय बोर्ड ने इसे 71.35 प्रतिशत बताया। अपीलीय बोर्ड ने आशंका जताई कि वर्तमान हियरिंग एड के साथ छात्रा मरीजों की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। इस आधार पर छात्रा को प्रवेश नहीं दिया गया। इसे छात्रा ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
दिव्यांगता के आकलन में अंतर को देखते हुए हाईकोर्ट ने केजीएमयू को छात्रा की दोबारा जांच कर उसकी मेडिकल पाठ्यक्रम पूरा करने की क्षमता पर रिपोर्ट देने को कहा था। विश्वविद्यालय की मेडिकल टीम ने भी उसे एमबीबीएस की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी करने में सक्षम नहीं माना। कोर्ट ने कार्यात्मक क्षमता, वैज्ञानिक मूल्यांकन और उचित सुविधाओं पर विचार करने के दिशानिर्देशों का उल्लेख करते हुए याचिका निस्तारित कर दी।