जिला न्यायालय ने मौनी अमावस्या पर माघ मेला क्षेत्र में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी व उनके शिष्यों की ओर से लगाए गए हमले के आरोपों की जांच कर अपर पुलिस आयुक्त अपराध से आख्या तलब की है।
जिला न्यायालय ने मौनी अमावस्या पर माघ मेला क्षेत्र में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी व उनके शिष्यों की ओर से लगाए गए हमले के आरोपों की जांच कर अपर पुलिस आयुक्त अपराध से आख्या तलब की है। अब मामले की सुनवाई छह फरवरी को होगी।
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यह आदेश अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप पारचा की अदालत ने आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से दाखिल अर्जी पर दिया है। मामला प्रयागराज के झूंसी थाना क्षेत्र का है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के लिए जाते वक्त अज्ञात लोगों पर हमले का आरोप लगाते हुए अर्जी दाखिल की है। इसमें कहा है कि जब वह लड्डू गोपाल की प्रतिमा लेकर अपने अनुयायियों के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तभी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के पास अज्ञात लोगों द्वारा जाम लगा कर उनकी यात्रा रोकी गई।
इसी दौरान अज्ञात लोगों ने उनसे व उनके अनुयायियों के साथ मारपीट की। आरोप है कि उन्होंने मामले की तहरीर झूंसी थाने में दी, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद व उनके साथियों समेत अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग के साथ जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
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अदालत ने अपने आदेश में प्रियंका श्रीवास्तव एवं अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट की निर्धारित विधि व्यवस्था का हवाला दिया। कहा कि ऐसे मामलों में अदालत रूटीन प्रक्रिया के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश पारित करने के लिए बाध्य नहीं है। मजिस्ट्रेट की अदालत आदेश पारित करने के पूर्व तथ्यों का सत्यापन करवा सकती है।