इससे पहले मामले में 21 दिसंबर, 2021 को प्रार्थना पत्र की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हरेंद्र नाथ ने की थी। सीजेएम कोर्ट ने कहा था कि घटना न्यायालय क्षेत्र के अंतर्गत नहीं हुई है। इस मामले की सुनवाई वहां का क्षेत्राधिकार रखने वाला मजिस्ट्रेट कर सकता है, जो स्थानीय अधिकारिता रखता हो।
पोषणीयता के आधार पर सीजेएम ने अर्जी निरस्त कर दी थी। इस आदेश को जिला जज के समक्ष निगरानी याचिका प्रस्तुत कर चुनौती दी गई और आदेश निरस्त किए जाने की मांग की गई। निगरानी याचिका की सुनवाई के बाद जिला जज ने नोटिस जारी करने का आदेश दिया।