इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में लखनऊ साइबर सेल की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। पति को यह बताने का निर्देश दिया है कि उसके खिलाफ हर्जाना क्यों न लगाया जाए।
कोर्ट ने पाया कि पति की ओर से महिला के मोबाइल नंबर के खिलाफ कथित रूप से फर्जी शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके आधार पर साइबर सेल ने नंबर को ब्लॉक कर दिया। नंबर इतने समय तक बंद रहा कि दूरसंचार कंपनी ने उसे किसी अन्य ग्राहक को आवंटित कर दिया।
न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने साइबर सेल के प्रभारी अधिकारी के हलफनामे को अत्यंत गैर जिम्मेदाराना बताया। कोर्ट ने माना कि साइबर शिकायतों के निस्तारण के लिए जारी निर्देशों का इस प्रकार दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। श्रद्धा पाठक की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साइबर सेल को संबंधित दूरसंचार कंपनी से समन्वय कर महिला का मोबाइल नंबर बहाल कराने के निर्देश दिए।
साथ ही पति को जवाबी हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि कथित निराधार शिकायत के लिए उसके खिलाफ हर्जाना क्यों न लगाया जाए।