दोबारा दस्तावेज लगाने पर हुआ खुलासा
एफआईआर के मुताबिक, नामित को बीमा कंपनी की ओर से किसी मद से कुछ और रकम मिलनी थी। इसलिए नामित ने फिर से कागजात जमा किए। जांच के दाैरान कागजात संदिग्ध दिखे। मामले में विंध्याचल पुलिस से संपर्क किया गया तो उन्होंने भी साफ इन्कार किया कि जिस थाने का जिक्र एफआईआर में किया गया वह अस्तित्व में ही नहीं है।
महिला के खाते में बचे सिर्फ 639 रुपये
एलआईसी अधिकारियों की जांच में पता चला कि दुर्गेश नंदिनी त्रिपाठी का बैंक खाता राजीव त्रिपाठी के मृत्यु के बाद छह मार्च 2025 को खोला गया था। खाते में चेक के माध्यम से 30 लाख रुपये जाते ही रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी गई। एक अगस्त 2025 को खाते में सिर्फ 639 रुपये ही थे। जांच में पता चला कि नंदनी अलोपीबाग की रहने वाली हैं। अधिकारियों ने मामले को सुनियोजित आर्थिक धोखाधड़ी बताया है। शाखा प्रबंधक ने पुलिस से प्रकरण की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) से कराने की मांग की है। सिविल लाइंस थाना प्रभारी रामाश्रय यादव ने बताया कि शाखा प्रबंधन की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।