इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सेक्स रैकेट चलाने वाली महिला का नाम उजाकर करते हुए जनहित याचिका दाखिल किए जाने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने याचिका दाखिल करने वाले के इस कार्यकी निंदा करते हुए याचिका खारिज कर दी है। कहा है कि यदि पुलिस आवयकता समझे तो वह मामले की जांच कर सकती है।कोर्ट ने कहा कि एक महिला पर निराधार आरोपों के साथ जनहित याचिका दाखिल करना उचित कार्य नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि याचिका में सेक्स रैकेट में शामिल तमाम महिलाओं की जांच कर कार्रवाई की मांग की गई है और एक आरोपी महिला को बिना पक्षकार बनाए टार्गेट किया गया है। महिला का नाम उजागर न करने के कानून के विपरीत अनर्गल आरोप लगाकर नाम का खुलासा किया गया है। कोर्ट ने इसे निंदनीय करार दिया है।और याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने शिवराम की जनहित याचिका पर दिया है।
याची ने महिला के खिलाफ पुलिस को सेक्स रैकेट चलाने की शिकायत की है ।उसका कहना है कि उसके पास वीडियो,आडियो कैसेट भी है।फिर भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि पुलिस जरूरी समझे तो जांच करे।