एक जून से रोडवेज बसों का संचालन भले शुरू हो गया हो लेकिन कोरोना का खौफ यात्रियों पर हावी है। बसों में सफर वही लोग कर रहे है जिनके पास यातायात का कोई अन्य साधन नहीं है। हालात यह है कि 1 जून से 10 जून तक की अवधि में रोडवेज का लोड फैक्टर महज 25 से 30 फ़ीसदी पर ही टिका है। रोज की कमाई भी 8 से दस लाख रुपए पर ही आकर टिक गई है।
रोडवेज के प्रयागराज परिक्षेत्र की बात करें तो यहां आठ डिपो में कुल 612 बसे हैं। प्रयागराज से सर्वाधिक यात्रियों की आवाजाही लखनऊ ,वाराणसी, गोरखपुर ,फैजाबाद रूट पर है। इन रूटों पर एसी बसें भी रोडवेज संचालित करता है। लॉकडाउन लगने के पूर्व इन सभी रूटों का लोड फैक्टर 70 फ़ीसदी से ज्यादा का था। इससे रोडवेज को भी हर रोज लाखों रुपए की आय हो रही थी।
कोरोनावायरस की वजह से लगे लॉकडाउन के बाद 1 जून से बसों का संचालन तो रोडवेज ने दोबारा शुरू कर दिया लेकिन यात्री ना मिलने से रोडवेज की स्थिति भी खराब हो रही है। जो कमाई पहले 60 लाख रुपए की थी वह घटकर आठ से 10 लाख रुपए तक पहुंच गई है। इस बारे में रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक टीकेएस बिसेन का कहना है कि वर्तमान समय बसों का लोड फैक्टर 25 से 30 फ़ीसदी पर ही आकर टिक गया है । बहुत मजबूरी में ही यात्री सफर के लिए आ रहे हैं ।
5 से 10 यात्री ही हो रहे बसों से रवाना
उधर बसों में सवारी ना मिलने की वजह से एक एक बस चलने में काफी विलंब हो जा रहा है। बृहस्पतिवार को सिविल लाइंस बस स्टैंड में जौनपुर के लिए एक बस तैयार खड़ी थी लेकिन उसमें 5 यात्री होने की वजह से बस परिचालक उसे ले जाने से कतरा रहा था तकरीबन आधे घंटे के इंतजार के बाद जब 3 लोग और बस में पहुंचे उसके बाद ही बस वहां से रवाना हो सकी। वहां मौजूद अन्य परिचालकों ने बताया कि इन दिनों यात्रियों का काफी टोटा है। इसी वजह से कम यात्री होने पर भी बसों का संचालन करना पड़ रहा है।