एसटीएफ ने शुआट्स के पंजीयन से जुड़ी जानकारियों के सत्यापन के लिए लखनऊ और कानपुर के फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स कार्यालयों से भी संपर्क साधा है। एसटीएफ की जांच शुरू होने के बाद माना जा रहा है कि सोसाइटी रजिस्ट्रार कार्यालय के कुछ अधिकारी, कर्मचारी भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।
25 अगस्त 1950 को लखनऊ के सोसाइटी रजिस्ट्रार कार्यालय ने संस्था को पंजीयन क्रमांक आई-4076 जारी किया था। इसे लेकर सवाल तब उठा, जब पता चला कि शुआट्स के पंजीयन क्रमांक 4076 के बाद 4077 और इसके बाद की सीरीज वाली कई संस्थाएं 1949 में ही रजिस्ट्रार कार्यालय के रिकॉर्ड में पंजीकृत हो चुकी हैं।
शुआट्स के बाद के रजिस्ट्रेशन क्रमांक आई-4077 पर कृषक एजुकेशनल सोसाइटी का पंजीयन 22 दिसंबर 1949 और जाटव शिक्षा प्रसार सभा का रजिस्ट्रेशन भी एक वर्ष पहले ही दर्ज पाया गया है। शुआट्स के पंजीयन सर्टिफिकेट पर कोऑपरेटिव सोसाइटी लखनऊ की मुहर लगी है, जबकि चिट फंड सोसाइटी के सर्टिफिकेट पर इसकी मुहर का कोई औचित्य नहीं है। एसटीएफ ने मूल पंजीयन पत्रावली, 1991 से लेकर अब तक हुए प्रबंध तंत्र में संशोधन, नवीनीकरण और अन्य अभिलेखों की प्रतियां ले ली हैं।
दो हजार करोड़ से अधिक मिल चुका अनुदान
पहली बार 1991 में मंडल स्तर पर चिट्स फंड सोसाइटी के दफ्तरों की स्थापना होने के बाद शुआट्स के रिकॉर्ड प्रयागराज आ गए थे। तब से नवीनीकरण, ऑडिट और प्रबंध समिति के गठन संबंधी प्रस्तावों को यहीं से मान्यता मिलती रही है। यूजीसी और अन्य मदों में वर्ष 1991 से अब तक शुआट्स को दो हजार करोड़ रुपये से अधिक अनुदान मिल चुका है। इसकी जांच होने पर कई बड़े अफसरों का गला भी फंस सकता है।