इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए बन रहे 200 बेड के भवन का निर्माण सात साल में भी पूरा नहीं होने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि शहर के बच्चों की चिकित्सा जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाए जा रहे भवन का समय पर पूरा नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में बच्चों के इलाज के लिए बन रहे 200 बेड के भवन का निर्माण सात साल में भी पूरा नहीं होने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि शहर के बच्चों की चिकित्सा जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाए जा रहे भवन का समय पर पूरा नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने ठेकेदार को शेष काम पूरा करने के लिए 15 दिन का समय देते हुए कंपनी की ब्लैकलिस्टिंग के आदेश पर भी रोक लगा दी है। कोर्ट ने यूपी सिडको के प्रबंध निदेशक संजीव सिंह और निर्माण कंपनी आरसीबी इंफ्राकॉन्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक रोहित अवस्थी को 29 अक्तूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। दोनों को किए गए प्रयासों का ब्योरा हलफनामे के साथ पेश करना होगा।
सुनवाई के दौरान ठेकेदार ने आरोप लगाया कि विभाग ने अतिरिक्त काम कराया, लेकिन कुछ भुगतान नहीं किया। उसने कहा कि ब्लैकलिस्ट किए जाने से काम प्रभावित हुआ है। ठेकेदार ने 15 दिन में शेष काम पूरा करने और दो और लिफ्ट लगाने का आश्वासन दिया। वहीं, यूपी सिडको के प्रबंध निदेशक ने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने जानबूझकर परियोजना में देरी की है। उनके अनुसार करीब 30 करोड़ रुपये की परियोजना में 50 लाख रुपये छोड़कर शेष भुगतान किया जा चुका है।
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कोर्ट ने दोनों के एक-दूसरे पर आरोप लगाने के रवैये पर नाराजगी जताई। कहा कि डेढ़ साल से मामले की निगरानी के बावजूद परियोजना पूरी नहीं हो सकी। करीब 200 बेड का यह भवन बच्चों के इलाज के लिए महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने ठेकेदार को काम पूरा करने का एक और अवसर दिया है।