आगरा जिले के खंदौली थाना क्षेत्र के पैलखेड़ा गांव निवासी जितेंद्र जुरैल के अधिवक्ता देवेंद्र कुमार मिश्रा ने दलील दी कि आरोपी का घरेलू नाम संदीप है। इसी नाम से वह सिपाही भर्ती की परीक्षा में शामिल हुआ था। जबकि राज्य सरकार के अपर शासकीय अधिवक्ता सुरेश बहादुर सिंह ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता में सेंधमारी न सिर्फ गंभीर अपराधिक कृत्य है बल्कि आम छात्रों के भविष्य के साथ भी अन्याय है। इसलिए आरोपी जमानत का हकदार नही है। अदालत ने आरोपी की ओर से किए गए दावों के समर्थन में ठोस सुबूतो के अभाव में जमानत याचिका खारिज कर दी।