प्रयागराज के पूरामुफ्ती में मूरी एक्सप्रेस को पलटाने की साजिश महज 25 मिनट में रची गई थी। दरअसल घटना से आधे घंटे पहले ही इसी लाइन पर सीमांचल एक्सप्रेस गुजरी थी। उस वक्त रेलवे ट्रैक पूरी तरह से क्लीयर थी और कहीं से भी किसी तरह की सूचना रेलवे अफसरों के पास नहीं पहुंची थी।
मूरी एक्सप्रेस रेलवे ट्रैक पर रखे पत्थर से लगभग 2:30 पर टकराई। लोको पायलट ने इसकी सूचना गार्ड को दी और फिर रेलवे के इंजीनियरिंग कंट्रोल विभाग और अफसरों तक जानकारी पहुंची। सूत्रों का कहना है कि मौके पर जो प्रारंभिक जांच पड़ताल हुई, उसके अनुसार यही बात सामने आई कि यह पूरी साजिश 25 मिनट पहले रची गई।
दरअसल दो बजे के करीब सीमांचल एक्सप्रेस ट्रेन इसी स्थान से सकुशल गुजरी थी। उस वक्त रेलवे ट्रैक क्लीयर था और परिचालन में किसी तरह के व्यवधान की सूचना नहीं मिली। इसके आधे घंटे बाद मूरी एक्सप्रेस आई और रेलवे ट्रैक पर रखे पत्थर से टकरा गई।
जानकारों का कहना है कि प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर यह साफ है कि रेलवे ट्रैक पर पत्थर रखने का काम दोपहर दो से 2:30 बजे के बीच हुआ। ऐसे में इस समयावधि में उपरोक्त स्थान के आसपास कौन-कौन लोग मौजूद थे, इसका पता लगाया जाना चाहिए।
अकेले का काम नहीं, दो से तीन व्यक्ति थे शामिल
प्रारंभिक जांच पड़ताल के क्रम में सामने आए तथ्यों से यह भी माना जा रहा है कि ट्रेन को पलटाने के लिए रेलवे ट्रैक पर पत्थर रखने का काम किसी अकेले व्यक्ति का नहीं। इसमें कम से कम दो या तीन व्यक्ति जरूर शामिल रहे। यह बात भी सामने आई है कि पत्थर कम से कम पांच से 10 मीटर की दूरी से उठाकर रेलवे ट्रैक तक लाया गया था।
दरअसल जिस कंक्रीट बाउंड्री पोस्ट का 1.7 मीटर का पत्थर रेलवे ट्रैक पर रखा गया, इसे एक व्यक्ति का अकेले उठा पाना संभव नहीं है। यह कंक्रीट बाउंड्री पोस्ट रेलवे ट्रैक के किनारे अस्थायी बाउंड्री बनाने के काम आता है। दो कंक्रीट बाउंड्री पोस्ट निश्चित दूरी पर जमीन में गाड़कर कर इनके बीच तार बांध दिए जाते हैं।
कई बार कुछ कंक्रीट बाउंड्री पोस्ट वहीं छूट भी जाते हैं। हालांकि यह बाउंड्री रेलवे ट्रैक से कम से कम पांच से 10 मीटर की दूरी पर बनाई जाती है। ऐसे में माना जा रहा है कि इन्हें वहां से उठाकर लाया गया।