यह भी आरोप लगाया कि नौकरी दिलाने के नाम पर उससे 20 लाख रुपये कैलाशानंद ने ले लिए लेकिन उसे नौकरी नहीं मिली। इसी को लेकर वह असंतुष्ट है। इस पर त्रिकाल भवंता ने नैनी पुलिस व कैलाशानंद को सूचना दी। पुलिस युवक को हिरासत में लेकर थाने ले गई। जहां एसीपी अजीत सिंह चौहान व डीसीपी सौरभ दीक्षित भी पहुंचे। एसटीएफ की टीम भी पहुंचकर पूछताछ में जुटी रही।
हरिद्वार आश्रम में भी गया था
कैलाशानंद ने बताया कि प्रयागराज से त्रिकाल भवंता का फोन आया था। उन्होंने बताया कि एक युवक आपकी हत्या की साजिश रच रहा है। उन्होंने उस युवक का नाम विक्रम सिंह व पता बागपत बताया था। आश्रम में आगंतुक रजिस्टर देखा गया तो पता चला कि युवक 29 नवंबर को आया था और चार घंटे से अधिक समय बिताया था। उसने यहां अपना गलत पता व नंबर लिखवाया था। उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी पुलिस कमिश्नर प्रयागराज को दी। रुपये लेने संबंधी आरोपों पर उन्होंने कहा कि मैं न उस युवक को जानता हूं और ना ही मेरी उससे मुलाकात हुई है।
युवक ने पूछताछ में बताया है कि त्रिकाल भवंता ने पहले उस पर खुद को मारने की साजिश रचने और फिर स्वामी कैलाशानंद को मारने की साजिश रचने का आरोप लगाया। उसका यह भी कहना है कि वह प्रयागराज घूमने आया था। त्रिकाल भवंता का नाम सुना था, ऐसे में सोचा कि प्रयागराज घूमने में उसे उनसे मदद मिल जाएगी। त्रिकाल भवंता को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है लेकिन वह पुलिस के समक्ष नहीं आई हैं। - सौरभ दीक्षित, डीसीपी यमुनानगर