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चुनाव में उठेगा भर्तियों की सीबीआई जांच का मुद्दा

Fri, 06 Jan 2017 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद।
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सीबीआई - फोटो : DEMO Pics
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विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। चुनाव में लोक सेवा आयोग की भर्तियों की सीबीआई जांच तथा अन्य भर्ती संस्थाओं की अनियमितता भी बड़ा मुद्दा होगी। प्रतियोगियों में केंद्र और प्रदेश सरकार दोनों के खिलाफ नाराजगी है। आयोग के खिलाफ तथा पक्ष में आंदोलन करने वाले कई छात्रनेता तो सीधे चुनाव से जुड़े हुए हैं।
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केंद्र और प्रदेश में काबिज भाजपा तथा सपा दोनों ही दल युवाओं की हिमायती होने की दावा करती आ रही हैं। 2012 विधानसभा चुनाव में सपा तथा 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत में युवाओं ने ही बड़ी भूमिका निभाई थी, लेकिन इस बार दोनों ही पार्टियों की राह उतनी आसान नहीं दिख रही। लोक सेवा आयोग की भर्तियों में अनियमितता का आरोप लगाते हुए प्रतियोगी तीन साल से आंदोलनरत हैं। वे भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। लोक सेवा आयोग, उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में अध्यक्ष तथा सदस्यों की गलत तरीके से नियुक्ति, पेपर लीक आदि ने प्रतियोगियों की नाराजगी और बढ़ा दी।

इन मुद्दों को लेकर उनका आंदोलन प्रदेश सरकार के खिलाफ भी रहा। खास यह कि प्रतियोगियों के इस आंदोलन में समाजवादी पार्टी को छोड़कर अन्य दलों के नेता भी शामिल हुए। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने तो धरना का नेतृत्व किया, लेकिन सीबीआई जांच की मांग पर केंद्र सरकार की चुप्पी की वजह से प्रतियोगियों के बड़े वर्ग में उनके खिलाफ भी नाराजगी है। इतना ही नहीं इन धरना-प्रदर्शन के समानांतर युवाओं के एक वर्ग ने प्रदेश सरकार तथा आयोग के पक्ष में भी आंदोलन चलाया। ऐसे में युवाओं का रुख किस ओर होगा इसका आंकलन तो राजनीतिक विष्लेशकों के लिए भी मुश्किल है, लेकिन खासतौर पर बेरोजगारी और भर्तियों में अनियमितता को लेकर प्रतियोगियों ने मोर्चा खोल दिया है।
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प्रतियोगियों का अलग-अलग धड़ा इन मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अवनीश पांडेय का कहना है कि उनकी ओर से हर विधानसभा क्षेत्र में जनसभाओं और जनसंपर्क अभियान के माध्यम से भर्तियों में अनियमितता का मुद्दा उठाया जाएगा। पर्चे भी छापे जाएंगे। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के कौशल सिंह तो इसी मुद्दे को लेकर चुनाव में भाग्य आजमाने की तैयारी में हैं।
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