इस बीच तहसील के अधिकारियों ने निर्माण का कई बार सिर्फ कागजों पर निर्देश देकर मामले की इतिश्री करते रहे और लाभार्थी जब भी निर्माण कार्य शुरू करता गांव केे दबंगों द्वारा अपनी दबंगई के बल पर जबरन उसका निर्माण कार्य रोक देते। भुक्तभोगी बुजुर्ग राधेश्याम ने बताया कि उसने संपूर्ण समाधान दिवस, समाधान दिवस, उपजिलाधिकारी हंडिया, तहसीलदार हंडिया, इंस्पेक्टर फूलपुर, जिलाधिकारी, मंडल आयुक्त, मुख्य राजस्व अधिकारी के साथ ही आईजीआरएस के माध्यम से उच्चाधिकारियों को 17 महीने में 72 दफे से अधिक शिकायती पत्र देकर आवास निर्माण की मांग कर चुके हैं, लेकिन अधिकारी हैं कि उनकी इस समस्या का समाधान नहीं कर रहे हैं। यही नहीं अधिकारियों द्वारा दबंगों के खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं की गई। आरोप है कि मनबढ़ दबंग अब उन्हें जान से मारने की धमकी भी देने लगे हैं।
जर्जर भवन में रहता है 75 वर्षीय बुजुर्ग, किसी भी समय हो सकता है हादसा
प्रधानमंत्री आवास निर्माण के लिए 17 महीने से दर-दर भटक रहा 75 वर्षीय बुजुर्ग राधेश्याम अपने पैतृक जर्जर हालत में पड़े कच्चे भवन में ही रहने को मजबूर है। उसका पैतृक आवास इस कदर जर्जर हालत में पहुंच गया है कि खपरैल के ऊपर पन्नी डालकर किसी तरह गुजारा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उसका जर्जर भवन बारिश के दिनों में किसी भी समय धरासाई हो सकता है। जिससे हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता।
बुजुर्ग का प्रधानमंत्री आवास यदि नहीं बनने दिया जा रहा है तो यह गंभीर बात है। मैं खुद इसे संज्ञान में लेकर कार्रवाई करूंगा। - दिग्विजय सिंह, उपजिलाधिकारी हंडिया।