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आयोग और निदेशालय के खिलाफ गरजे प्रतियोगी

Fri, 30 Jun 2017 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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भर्तियों पर लगी रोक के खिलाफ असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के अभ्यर्थियों ने बृहस्पतिवार को उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग और उच्च शिक्षा निदेशालय में धरना-प्रदर्शन किया। अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती पर लगी रोक हटाने और जो भर्तियां हो चुकी हैं, उनके तहत ज्वाइनिंग की मांग कर रहे हैं।
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उच्चतर शिक्षा संघर्ष मोर्चा के बैनर तले प्रतियोगियों ने बृहस्पतिवार को उच्च शिक्षा सेवा चयन आयोग में धरना-प्रदर्शन किया और आयोग के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा। मोर्चा के अध्यक्ष चंद्रेश पांडेय के नेतृत्व में ज्ञापन देने पहुंचे प्रतियोगियों ने अध्यक्ष प्रभात मित्तल से मुलाकात की और विज्ञापन संख्या 47 के तहत परीक्षा की तिथि जल्द घोषित किए जाने की मांग की। साथ ही विज्ञापन संख्या 46 के तहत शेष विषयों की साक्षात्कार तिथि की घोषणा शीघ्र करने की मांग की। प्रतियोगियों के अनुसार अध्यक्ष ने आश्वसन दिया कि विज्ञापन संख्या 46 के तहत शेष विषयों के साक्षात्कार की तिथि पांच जुलाई तक घोषित की जा सकती है। वहीं, विज्ञापन संख्या 47 के तहत परीक्षा तिथि 15 जुलाई तक घोषित हो सकती है।

प्रतियोगियों के मुताबिक अध्यक्ष ने यह भी बताया कि परीक्षा के 24 घंटे के भीतर ओएमआर शीट ऑनलाइन कर दी जाएगी। साथ ही सब कुछ ठीक रहा तो तकरीबन चार हजार पद विज्ञापित किए जाएंगे। प्रतियोगियों ने कहा कि 15 जुलाई तक आयोग ने इस पर निर्णय नहीं लिया तो प्रतियोगी फिर से आयोग का घेराव करेंगे। उधर, विज्ञापन संख्या 46 के तहत शिक्षक भर्ती के चयनित अभ्यर्थियों ने बृहस्पतिवार को भी उच्च शिक्षा निदेशालय में धरना-प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि चयनित अभ्यर्थियों को कॉलेज आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर तत्काल नियुक्ति दी जाए।
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प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद सरकार विभिन्न आयोगों और चयन बोर्ड की ओर से जारी भर्ती प्रक्रिया पर रोक न लगाती तो प्रदेश को हजारों नए डॉक्टर और शिक्षक मिल गए होते। भर्तियों पर रोक के लिए प्रतियोगी छात्रों के साथ अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है और इसी वजह से विरोध ने तेजी पकड़ ली है।

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में तकरीबन 3400 नए चिकित्सकों की नियुक्ति की जानी थी लेकिन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से जारी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दिए जाने से चिकित्सकों के साथ कई अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भर्तियां भी ठप हो गईं। इसके साथ ही उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग में भी असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्तियां पड़ी हैं। वहीं, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की 2011 की शिक्षक भर्ती के साक्षात्कार पर रोक लगी है। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी कुछ विषयों की शिक्षक भर्ती अटकी हुई है और  राजकीय विद्यालयों में शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा फंसी हुई है। अगर ये सभी भर्तियां समय से पूरी हो जातीं तो सरकारी चिकित्सालयों को नए डॉक्टर मिल गए होते और महाविद्यालयों एवं राजकीय विद्यालयों के साथ अन्य शिक्षण संस्थाओं में भी शिक्षकों की कमी दूर हो गई होती।
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