अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा (एआईकेएमएस) के तीसरे अखिल भारतीय सम्मेलन के तीसरे दिन जेएनयू के प्रोफेसर रवि श्रीवास्तव ने आम जन के हालात को बयां किया। उन्होंने कहा कि आजादी के 67 साल बाद उनकी बेहतरी की उम्मीदें धुमिल हो गईं हैं। बराबरी और समाजवाद के आदर्श जो आजादी के तुरंत बाद अपनाए गए थे। उनको फलीभूत करने के लिए बनाई गई संस्थाओं को आज बर्बाद किया जा रहा है। ऐसी अवस्था में अपने सपनों को साकार करने के लिए भारतीय जनमानस को नए सिरे से संघर्ष करने की जरूरत है।
प्रो. श्रीवास्तव ने हैदराबाद स्थित केंद्रीय विवि, कृषि संकट, किसानों की आत्म हत्याओं सहित कई मामलों को उठाया। मौजूदा नीतियों की आलोचना करते हुए केंद्र सरकार की खिंचाईं की। कार्यक्रम में ‘सम्मेलन उद्घोष’ दस्तावेज को सभी प्रतिनिधियों ने एक मत से स्वीकार किया। इसमें 26 प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव रखे थे। सभा के निर्गामी महासचिव सुशांत झा ने राजनैतिक संगठनात्मक दस्तावेज चर्चा करने के लिए रखा। रिपोर्ट में दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद किए गए संघषों को रखा गया। इलाहाबाद और कौशांबी में एआईकेएमएस ने बालू खनन मजदूरों एवं पत्थर खदान मजदूरों के संघर्षों को बताया गया। कहा गया कि आंध्र प्रदेश में कोस्टल कारिडोर एवं पोलावरम बांध परियोजनाओ के खिलाफ संघर्ष जारी है।