इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हुए बवाल की जांच करने आए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्यों ने मंगलवार को विश्वविद्यालय प्रशासन के अफसरों पर सवालों की बौछार कर दी। कमेटी के सदस्य एवं यूजीसी के सचिव जसपाल एस. संधू, एमएचआरडी के संयुक्त सचिव प्रवीण कुमार सिंह और दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रो. एसपी सिंह प्रॉक्टोरियल बोर्ड से पूछताछ के दौरान कई दस्तावेज तलब कर लिए। उन्होंने वार्डनों, अधीक्षकों और विश्वविद्यालय कर्मियों से भी मुलाकात की। इस दौरान इविवि प्रशासन के अफसरों के चेहरे पर तनाव दिखा।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से गठित कमेटी के सदस्यों ने चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के अन्य सदस्यों से पूछा कि हॉस्टल से अवैध छात्रों को बाहर किए जाने के मामले में उन्होंने अपने स्तर से अब तक क्या किया। इस पर चीफ प्रॉक्टर ने बताया कि पिछले साल अक्तूबर से इस साल हाईकोर्ट का आदेश आने से पहले तक उन्होंने जिला प्रशासन को 26 पत्र लिखे लेकिन कभी चुनाव तो कभी किसी दूसरे कारण से हॉस्टलों में रेड नहीं डाली जा सकी। प्रॉक्टर ने यह भी बताया कि तकरीबन 60 छात्र ऐसे हैं, जिन्हें हॉस्टल में कमरे आवंटित हुए और उन्होंने फीस भी जमा की लेकिन उन्हें कमरों पर कब्जा नहीं दिलाया जा सका।
उन्होंने हाल ही खाली कराए गए पंत हॉस्टल के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने हॉस्टल वॉश आउट प्लान के बारे में भी जानकारी दी। कमेटी के सदस्यों ने प्रॉक्टोरियल बोर्ड से यह भी पूछा कि ऐसे कितने छात्र हैं जो वॉश आउट की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। चीफ प्रॉक्टर ने सदस्यों को इस बारे में जानकारी दी और यह भी बताया गया कि कितने समर हॉस्टल बनाए गए हैं और किन छात्र-छात्राओं को उनमें रहने की अनुमति दी जाएगी। कमेटी के सदस्यों ने वीसी से भी मुलाकात की। वीसी प्रो. रतन लाल हांगलू ने 28 अप्रैल को हुए बवाल की पूरी रिपोर्ट कमेटी के सदस्यों का सौंपी। सदस्यों ने सिविल लाइंस स्थित एक होटल में डीएम एवं एसएसपी से भी मुलाकात की। इससे पूर्व कमेटी के सदस्यों ने संगम में जाकर स्नान भी किया।
प्रॉक्टोरियल बोर्ड से बातचीत के दौरान फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के एक सदस्य ने चीफ प्रॉक्टर के समक्ष एक सवाल उठाया कि वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (ऑटा) के अध्यक्ष हैं और चीफ प्रॉक्टर की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। ऐसे में खुद प्रशासन का हिस्सा होकर प्रशासन के समक्ष शिक्षकों की समस्याओं को कैसे रखते होंगे। इस सवाल के जवाब में चीफ प्रॉक्टर बोले, ‘मैं ऑटा अध्यक्ष और चीफ प्रॉक्टर दोनों हूं लेकिन नेता विरोधी दल नहीं हूं।’
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्यों ने विधि विभाग में फूंके गए ऑडिटोरियम और ताराचंद हॉस्टल का भी निरीक्षण किया। ताराचंद हॉस्टल में उन्होंने छात्रों से मुलाकात की। छात्रों ने उन्हें हॉस्टल की बदहाली से अवगत कराया। बताया कि हॉस्टलों में मेस की सुविधा भी नहीं है। टीम के सदस्यों ने ऑडिटोरियम के निरीक्षण के दौरान वहां हुए नुकसान के बारे में भी जानकारी इकट्ठा की। साथ ही एफसीआई बिल्डिंग में हुई तोड़फोड़ के बारे में भी विश्वविद्यालय प्रशासन के अफसरों से पूछताछ की।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने भी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्यों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर हुए आंदोलन, कर्मचारियों के निलंबन, कर्मचारी नेता के घर में घुसकर उनपर किए गए जानलेवा हमले समेत कई मुद्दे उठाए। कमेटी के सदस्यों ने कहा कि वे यहां 28 अप्रैल को हुए बवाल की जांच करने आए हैं। हालांकि उन्होंने कर्मचारियों से सभी दस्तावेज लिए और आश्वस्त किया कि ये दस्तावेज मानव संसाधन विकास मंत्रालय तक पहुंचा दिए जाएंगे। इस दौरान हॉस्टलों के कुछ वैध छात्रों ने भी कमेटी के सदस्यों से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई।
- कमेटी के सदस्य डीन साइंस के कार्यालय भी पहुंचे। वहां पूर्व वीसी प्रो. ए. सत्यनारायण से उनकी मुलाकात हुई। प्रो. सत्यनारायण ने बताया कि उनके मामले में कमेटी के सदस्यों को पहले से पूरी जानकारी है। उनकी और सदस्यों के बीच सिर्फ 28 अप्रैल को हुए बवाल पर बातचीत हुई। उन्होंने सदस्यों को बताया कि नियमों की अनदेखी और छात्रों एवं विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवादहीनता के कारण बवाल हुआ। अगर प्रशासन वक्त रहते छात्रों की समस्या सुन लेता तो यह नौबत न आती।
कमेटी के सदस्य जेल में बंद छात्रसंघ अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष से मिलना चाह रहे थे। उन्होंने चीफ प्रॉक्टर से पूछा कि क्या अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष को यहां बुलाया जा सकता है। उन्होंने एडीएम सिटी से बात की और एडीएम सिटी ने जेल में फोन से बात की। अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष से कहा गया कि चाहें तो अपने किसी प्रतिनिधि को सदस्यों से मिलने भेज दें। इस पर अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष राजी नहीं हुए। उन्होंने कहा कि साक्ष्यों के साथ खुद मिलेंगे लेकिन नियमत: ऐसा नहीं हो सका और कमेटी के सदस्य भी छात्रों से मिलने जेल नहीं गए।