आपके पास किसी भी क्षेत्र से जुड़ा कोई नया विचार है और आपको लगता है कि यह सबसे अलग है और उसका लागू होना जनहित में है तो जिला इनावेशन समिति के समक्ष अपने विचार जरूर रखें। समिति के माध्यम से नियोजन विभाग की राज्य इनोवेशन कौंसिल को आपकी नई सोच से अवगत कराया जाएगा। अगर सबकुछ ठीक रहा तो इसे लागू किया जाएगा और आपको भी अलग पहचान मिलेगी।
इनोवेशन सेल के निदेशक डॉ. आनंद मिश्र बृहस्पतिवार को इलाहाबाद में थे। कलक्ट्रेट के संगम सभागार में जिला इनोवेशन समिति की कार्यशला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी, गैरसरकारी संगठनों के साथ व्यक्ति स्तर से भी मौलिक नवाचार समिति के माध्यम से प्रस्ताव के रूप में राज्य की स्तरीय सेल को प्रेषित किए जाएंगे। अगर कोई किसान खेती में कुछ नया कर रहा है तो ये भी इनोवशन हैं और इस पर काम हो सकता है।
इसी तरह शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, नागरिक सुविधाओं, उद्योग, कारोबार, मनोरंजन, पर्यावरण, स्वच्छता समेत कई क्षेत्रों में मौलिक नवाचार आ सकते हैं और जनहित में इन्हें लागू किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में बेहतरीन काम के लिए राज्य इनावेशन कोष एवं राज्य इनोवेशन सेल की स्थापना की गई है। इसका उद्देश्य प्रदेश में नवीन प्रयोगों को बढ़ावा देने और उन्हें पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में क्रियान्वित करना है। कार्यशाला में मौजूद नासी इलाहाबाद के कार्यकारी सचिव डॉ. नीरज कुमार ने इलाहाबाद में इनोवेशन केंद्र की स्थापना की मांग की।
बायोवेद शोध संस्थान के निदेशक डॉ. वीके द्विवेदी ने लोगों का गांव से पलायन रोकने के लिए रोजगार सृजन के तहत सादे जल में मोती पालन, केले के तने से फाइवर और अन्य मूल्य वर्धित वस्तुओं के निर्माण, कृषि अपशिष्ट पदार्थों एवं गोबर से मूल्य वर्धित उत्पादन से संबंधित परियोजनाओं को प्रस्तुत किया। वालेंटरी इंस्टीट्यॅट फॉर कम्युनिटी एप्लाइयड साइंस के निदेशक डॉ. एमके सिंह, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वनस्पति विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनुपम दीक्षित, प्रो. रवींद्र धर, शियाट्स विश्वविद्यालय के डीन शोध डॉ. शैलेश मार्कर,डॉ. जोनाथन लाल, डॉ. डेविड, गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्था के डॉ. सुशील सिंह, जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक वसीम अहमद आदि ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यशाला के सदस्य सचिव और जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी राजेश कुमार सिंह तथा शक्तिपाल सिंह ने कार्यशाला के विषय पर प्रकाश डाला।