महाकुंभ के चिकित्सालयों में आने वाले मरीजों को सेंट्रल या जिला अस्पताल में भेजने से पहले उनके हाथों में एक पट्टी (रिबन) बांधी जाएगी। लाल, पीले, हरे रंग के इन रिबन को देख डॉक्टरों को पता चल जाएगा कि मरीज की स्थिति कैसी है।
किसी आकस्मिक घटना के बाद आपदा प्रबंधन के तहत महाकुंभ के चिकित्सा स्टाफ को इस बाबत आगाह किया जा रहा है। उन्हें इसकी खास ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
महाकुंभ में करोड़ों पर्यटकों और स्नानार्थियों के आने की संभावना है। इस भीड़ में हजारों लोग कड़ाके की ठंड में बीमार भी पड़ सकते हैं। इसके अलावा, भगदड़, आगजनी, बम विस्फोट का भी खतरा बना रहता है। पुलिस के साथ स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी ऐसी घटनाओं के मद्देनजर तैयारी की गई है।
इसकी खातिर 20 क्विक रेस्पांस मेडिकल टीम बनी है। एंबुलेंस में मुस्तैद रहने वाली हर टीम में अनुभवी डॉक्टर और दवाइयों की किट रहेगी। सभी 10 जोनल हॉस्पिटल में आग, बम, भगदड़, डूबने की घटनाओं पर इलाज के लिए खास किट मुहैया करा दी गई है। चिकित्सा व्यवस्था प्रभारी मेजर डॉ. बीपी सिंह सभी हॉस्पिटल में जाकर खुद डॉक्टरों और स्टाफ को आपदा प्रबंधन की ट्रेनिंग दे रहे हैं।
रविवार दोपहर उन्होंने अरैल पश्चिमी चिकित्सालय जाकर वहां के स्टाफ को प्रशिक्षण दिया कि मेले में गंभीर बीमार मरीज मिलें तो क्या करें। उन्हें मरीज को स्ट्रेचर पर उठाकर चिकित्सालय लाने, उपचार और गंभीर स्थिति होने पर एंबुलेंस से सेंट्रल या जिला अस्पताल भेजने की ट्रेनिंग दी। उन्हें हिदायत दी कि गंभीर मरीज की कलाई में लाल, कम गंभीर के पीला और सामान्य रोगी के हरा रिबन बांधकर ही रेफर करें। इस बारे में सभी जिला अस्पतालों के डॉक्टरों को भी आगाह कर दिया गया है।