इलाहाबाद। महाकुंभ में तरह-तरह के साधु-संतों के बीच जंगम जोगी भी आ पहुंचे हैं। अनोखी वेशभूषा में सजे और शिव भक्त कहे जाने वाले जंगम जोगियों की टोली सन्यासी अखाड़ों के शिविरों में जाकर शिव विवाह और शिव महिमा का बखान कर रही है। उनकी अनोखी वेशभूषा मेला में आने वालों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गई है। हरियाणा से आए तकरीबन 500 जंगम जोगियों के सिर पर भगवान शिव का नाग, कानों में पार्वती के कुंडल एवं माथे पर बिंदी, भगवान विष्णु का मुकुट एवं मोरपंखी तथा ब्रह्मा की रुद्राक्ष और जनेऊ धारण करने के साथ हाथों में नंदी बैल की टल्ली (घंटी) लेकर निकलते हैं। केसरिया वस्त्र धारण किए जंगम जोगी एक से दूसरे शिविर में जाकर गीतों के जरिए संतों को भगवान शिव के विवाह की कथा सुनाते हैं। उन्हें शिवपुराण कंठस्थ है। जंगम जोगी दशनाम परंपरा का भी गुणगान कर रहे हैं।
बालीराम जंगम का कहना है कि सुबह से शाम तक दशनामी अखाड़ों में पवित्र गीत गाकर संतों की साधना में सहयोग करते हैं। इससे प्रसन्न होकर संत-महात्मा दक्षिणा देते हैं। राजकुमार जंगम के मुताबिक उनका कोई गुरु नहीं होता। परिवार में ही शिवपुराण, शिव स्त्रोत कंठस्थ कराया जाता है।
संन्यासियों के पुरोहित
इलाहाबाद। दशनामी संतों के पुरोहित जंगम दूसरे साधुओं एवं गृहस्थों से दान नहीं लेते। राजकुमार जंगम के मुताबिक जंगम गृहस्थ होते हैं और नागा संप्रदाय में विचरण, पंगत और संन्यासियों से दान लेते हैं। शाही स्नान के दौरान जंगम शिवमहिमा गाते हुए जुलूस के साथ चलेंगे।
शिव विवाह से हुई जंगम की उत्पत्ति
मान्यता है कि जंगम की उत्पत्ति भगवान शिव के विवाह से हुई। शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव ने भगवान विष्णु एवं ब्रह्मा को विवाह कराने के लिए दक्षिणा देना चाहा पर उन्होंने इससे इंकार कर दिया, जिस पर महादेव को क्रोध आ गया। उन्होंने अपनी जांघ पीटकर जंगम साधुओं को उत्पन्न किया, जिसने महादेव से दान लेकर उनके विवाह उत्सव में गीत गाए और रस्में संपन्न कराईं।