भद्रा के भंवर से निकलकर होलिका में आग लगी तो होलियारों का सब्र जवाब दे गया। कोई इंतजार नहीं, शुरू हो गई रंगों की बारिश। शहर के हर गली, मोहल्ले में पूरे दो दिनों तक जमकर रंग बरसा। होली की मस्ती में पूरा शहर सराबोर रहा। मोहल्ले-मोहल्ले अबीर- गुलाल उड़ते होलियारों की टोलियां घूमती रहीं। शुरुआत घर के आंगन, चौबारे से हुई, फिर लोग मोहल्ले के चौराहों पर जमा हुआ और फिर होलियारों की टोलियों ने घर-घर जाकर सभी को अबीर-गुलाल लगाकर होली के रंग में रंगा, शुभकामनाएं दीं और अपने संग मिला लिया। आंगन और छतों पर बच्चों और महिलाओं ने जमकर एक दूसरे को भिगोया।
हालांकि माथे और चेहरे पर अबीर-गुलाल से ही शुरुआत हुई लेकिन जल्द ही चेहरों पर भी रंग पोता गया, बालों में रंग डाला गया। बच्चे और महिलाएं भले ही पिचकारियों से एक दूसरे को भिगोने में मगन रहीं लेकिन युवाओं ने तो बाल्टियों में रंग भरभर कर एक दूसरे को भिगोया। थोड़ी ही देर बाद चेहरों को पहचानना भी मुश्किल हुआ। रंगों से तन-मन, छत-आंगन भीगा तो नालियां भी रंगीन हो गईं। सड़क-चौराहे पर भी रंग गए। सड़कों, चौराहों, गलियों में युवाओं, बुजुर्गों की टोलियां घूमती रहीं तो महिलाओं, बेटियों ने एक से दूसरे के छत पर जाकर रंगों में भिगाने का काम किया। रंगों के साथ लोग घर-घर गुझिया-पापड़ का लुत्फ भी लेते रहे।
चौक, लोकनाथ, कटरा, दारागंज की होली सबसे खास रही। चौक-लोकनाथ की तरह की तरह ही खुल्दाबाद चौराहे के करीब, नूरुल्लाह रोड पर जमकर होली हुई। कई ड्रमों में रंग भरा गया। जमकर एक दूसरे को रंगों से भिगोने के बाद लोगों ने एक दूसरे के कपड़े फाड़कर केबल, टेलीफोन के तारों पर टांग दिए। सदियापुर, मीरापुर, कीडगंज, मुट्ठीगंज, बलुआघाट, कीडगंज, अल्लापुर, कर्नलगंज, बैरहना, जार्जटाउन, टैगोर टाउन, मम्फोर्डगंज, गोविंदपुर, तेलियरगंज, प्रीतमनगर, बेनीगंज, राजापुर, राजरुपपुर आदि मोहल्लों में भी जमकर रंग बरसा।
प्रशासन की तमाम रोकटोक के बावजूद तमाम गली-मोहल्लों, चौराहों पर लाउडस्पीकर से हीली के नए-पुराने गीत बजे। एक बार फिर पानी-पानी, नाकाबंदी, सीधी-सादी छोरी शराबी हो गई के अतिरिक्त रंग बरसे भीगे चुनर वाली, होली आई से कन्हाई, आज न छोड़ेंगे, होली के दिन दिल मिल जाते हैं सहित होली के तमाम नए-पुराने गीत खूब बजे और युवाओं बच्चों की टोलियां इन गीतों पर जमकर थिरकीं।