प्रथम शाही स्नान से पहले मूल अक्षयवट को आम श्रद्धालुओं के दर्शन को खोलने के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मुख्य द्वार पर फ्लैक्स बोर्ड लगा दिया गया। अकबर के किले में मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर दी गई है। सरस्वती कूप पर बैरीकेडिंग, लाइटिंग के साथ शीशे का कवर भी लगवा दिया गया।10 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शिलापट का अनावरण कर मूल अक्षयवट में आम श्रद्धालुओं के दर्शन की शुरुआत करेंगे।
कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने पीडब्यूडी व बिजली विभाग के अभियंताओं के साथ मूल अक्षयवट में दर्शन की तैयारियों की समीक्षा की। श्रद्धालुओं के सामानों की जांच के लिए स्कैनर लगाने केसाथ ही किले के भीतर अवस्थापना सुविधाओं का काम पूरा कर लिया गया है। पातालपुरी व सरस्वती कूप मार्ग जाने वाली गैलरी में भी बैरीकेडिंग कराने के लिए कहा गया है। 220 मीटर लंबे और डेढ़ मीटर चौड़े मूल अक्षयवट के प्रवेश मार्ग के दोनों तरफ सुरक्षा के लिए जाली लगा दी गई है।
निकास मार्ग दो मीटर चौड़ा बनाया गया है। इसके बीच डेढ़ मीटर चौड़ा ग्रीन कॉरीडोर भी तैयार किया गया है। किले की दीवार से लगा आपातकालीन रास्ता भी दिया गया है। सरस्वती कूप पर शीशे का कवर लगाने के साथ ही परिक्रमा पथ दिया गया है। यहां श्रद्धालु मां सरस्वती की परिक्रमा कर सकेंगे। जबकि सुरक्षा घेरे में स्थित मूल अक्षयवट का दर्शन श्रद्धालुओं को चलते-चलते करना होगा। वहां न तो पुजारी होंगे और न ही पूजा-परिक्रमा करने की छूट मिलेगी।
श्रद्धालु एक तरफ से आएंगे और मूल अक्षयवट के दर्शन कर निकास मार्ग से वापस किला द्वार के पास से पातालपुरी और फिर सरस्वती कूप जाएंगे। सरस्वती कूप के दर्शन के बाद त्रिवेणी मार्ग से श्रद्धालु बाहर निकलेंगे। सुरक्षा की दृष्टि के पुलिस के जवानों की रोस्टर ड्यूटी लगाई जाएगी।