अंतत: तमाम अटकलों पर लगा विराम। पंचदशनाम जूना अखाड़े में किन्नर अखाड़े का विलय नहीं होगा बल्कि स्वतंत्र अस्तित्व के साथ वह जूना के साथ आएगा। दोनों अखाड़ों के बीच देर रात तक चली बैठक के बाद किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने स्पष्ट रूप से घोषणा की कि किन्नर अखाड़ा किसी के साथ विलय नहीं करेगा, वह अपनी शर्तों के साथ ही जूना के साथ रहेगा।
किन्नर अखाड़ा ही रहेगा। आचार्य महामंडलेश्वर से लेकर अन्य महामंडलेश्वर भी अपने पदों पर पूर्ववत रहेंगे। अपनी कुलदेवी और निशान के साथ पूजा-अनुष्ठान करेंगे। किन्नर अखाड़ा जूना के शाही स्नान में शामिल होगा लेकिन परंपरा के मुताबिक वह त्रिकाल संध्या के साथ ‘अमृत स्नान’ करेगा। इसी तरह वह पूर्ववत अपनी अलग पेशवाई यानी देवत्व यात्रा भी निकलेगा।
‘अमर उजाला’ से बातचीत के बाद आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण ने कहा कि अब किन्नर अखाड़े के संत-महात्मा बुधवार को संगम स्नान के बाद मौजगिरि स्थित जूना के आश्रम में क्षौरकर्म कराने के साथ ही अन्य अनुष्ठानों में शामिल होंगे। इसके लिए जूना राजी हो गया है।
वहीं जूना के संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने कहा, जूना में किन्नर अखाड़े का स्वागत है। जहां तक तेरह अखाड़ों की संख्या है तो अनियों में भी कई अखाड़े हैं। जूना अखाड़े के साथ आना और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से जुड़ना, दोनों दो अलग-अलग बातें हैं। हालांकि इस बारे में अभी सहयोगियों आवाहन और अग्नि अखाड़ों के श्रीमहंतों सहित अखाड़ा परिषद केसदस्यों को भी भरोसे में लिया जाएगा। सभी को मनाना और मिलाकर चलना है।
बातचीत में जूना के उपाध्यक्ष महंत प्रेम गिरि, राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती सहित अनेक श्रीेमहंत और किन्नर अखाड़े की ओर से आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी, उत्तर भारत की प्रभारी महामंडलेश्वर भवानी मां आदि शामिल थीं।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने बताया कि, अखाड़ा शब्द के साथ किसी अखाड़े का अखाड़ा परिषद में शामिल और स्वीकार करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता, बाकी किसी अन्य रूप में किसी के साथ आना अलग बात है।