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सूर्य ग्रहण पर आसमान में बादलों का घेरा,मोक्ष के लिए जतन

Thu, 10 Jun 2021 11:30 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • संगम पर मोक्ष के लिए आराधना, डुबकी लगाकर लोगों ने किया जप-तप और ध्यान
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सूर्य ग्रहण पर अपनों के मोक्ष के लिए संगम पर विधि-विधान से अनुष्ठान करने पहुंचे लोग। - फोटो : prayagraj
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विस्तार
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साल के पहलेे सूर्यग्रहण पर बृहस्पतिवार को मोक्ष के लिए दिन भर अनुष्ठान किए गए। उपछाया ग्रहण लगने के बावजूद इसकी अवधि पांच घंटे से अधिक रही। इस वजह से मठों, मंदिरों से लेकर संगम तक भगवान सूर्य के मोक्ष के लिए भजन,कीर्तन और जप किए गए। इस दिन आसमान में घटाएं घिरने और रिमझिम बारिश होने से लोग सूर्यग्रहण के आंशिक रूप को भी नहीं देख सके।

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ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर सूर्य ग्रहण बृहस्पतिवार की दोपहर 1:42 बजे से आरंभ हुआ। ग्रहण काल शाम 6:41 बजे तक रहा। इस दौरान करीब पांच घंटे तक भगवान सूर्य ग्रहण काल में रहे। रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र केे साथ शूल योग में लगेे इस ग्रहण के दौरान मोक्ष के लिए अनुष्ठान किए जाते रहे। इस दौरान संगम पर लोगों ने भगवान सूर्य के मोक्ष के लिए जतन किया। जल में खड़े होकर श्रद्धालु जप करते रहे। हालांकि उपछाया सूर्य ग्रहण लगने की वजह से इस दौरान सूतक काल की मान्यता नहीं रही, लेकिन ग्रहण को लेकर लोगों ने मठों, मंदिरों में मोक्ष के लिए भजन -कीर्तन किया।



इस दिन शनि जयंती और वट सावित्री व्रत साथ पड़ने से सूर्यग्रहण का महत्व और भी बढ़ गया था। ज्योतिषाचार्यों केे अनुसार इस ग्रहण के दौरान वैसे तो सभी 12 राशियों पर प्रभाव पड़ा, लेकिन खास तौर सेे पांच राशियों के जातकों के लिए यह अधिक प्रभाव डालने वाला रहा। मेष, बृषभ, मिथुन, तुला और मकर राशि के जातकों को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई थी।

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