पीसीएस-2016 के रिजल्ट संशोधन संबंधी इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से रोक लगाए जाने के बाद पीसीएस मुख्य परीक्षा-2016 की कॉपियां जंचने और उसके बाद रिजल्ट तैयार किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद लोक सेवा आयोग में प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कवायद शुरू हो गई है। इससे तकरीबन 13 हजार अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी।
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा पिछले साल 20 मार्च को हुई थी, जिसमें 633 पदों के लिए दो लाख 50 हजार 696 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम 20 मई को घोषित हुआ था, जिसमें 14 हजार 615 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए थे। मुख्य परीक्षा 20 सितंबर से आठ अक्तूबर तक इलाहाबाद और लखनऊ के 29 केंद्रों हुई थी और इसमें 12 हजार 897 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। इसी बीच प्रारंभिक परीक्षा में गलत प्रश्न पूछे जाने का मामला हाईकोर्ट चला गया। हाईकोर्ट ने अपने स्तर से विशेषज्ञों की एक कमेटी बना दी थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने आदेश दिया था कि चार प्रश्नों को डिलीट करते हुए एक प्रश्न के दो विकल्पों को सही मानते हुए कॉपियों का मूल्यांकन किया जाएगा।
इसके बाद प्रारंभिक परीक्षा में जो अभ्यर्थी सफल होते हैं, उनके लिए अलग से मुख्य परीक्षा कराई जाए और जो अभ्यर्थी असफल होते हैं, उनके नाम मुख्य परीक्षा से हटा दिए जाएं। हाईकोर्ट ने यह आदेश नौ दिसंबर 2016 को दिया। तब तक पीसीएस की मुख्य परीक्षा हो चुकी थी। आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि कॉपियों के मूल्यांकन के बाद सफल होने वाले नए अभ्यर्थियों के लिए अलग से मुख्य परीक्षा कराई तो डबल स्टैंडर्ड पेपर की समस्या सामने आएगी। ऐसे में लोक सेवा आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी। आयोग के सचिव अटल कुमार राय का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिलने के बाद अब कॉपियों को जांचने और रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।