एसआईटी से 15 सितंबर को तलब की रिपोर्ट
मुख्य न्यायाधीश ने वकीलों की मांगों पर विचार के लिए बड़ी पहल की और सात सिंतबर को हाईकोर्ट के चार जजों की एक समिति गठित की। इस कमेटी ने वकीलों की सभी मांगों पर विचार करते हुए उन्हें छह बिंदुओं में समेटा। इसके बाद वकीलों के साथ गतिरोध टलने का रास्ता साफ होता दिखाई दिया। इसी के बाद स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सुनवाई की।
हाईकोर्ट ने वकीलों की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर पर शासन की ओर से गठित एसआईटी से 15 सितंबर तक रिपोर्ट तलब की है। इसी दिन नवगठित छह सदस्यीय न्यायिक कमेटी भी अलग से अपनी रिपोर्ट देगी। कोर्ट के इस आदेश के बाद यूपी बार कौंसिल ने सोमवार से अदालती काम पर लौटने का फैसला किया है। हालांकि, बार कौंसिल ने सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन जारी रखने का एलान किया है।
20 को विधानसभा का घेराव करेंगे वकील
उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के अध्यक्ष शिव किशोर गौड़ ने पत्रकारों से कहा कि यूपी सरकार के किसी मंत्री या प्रतिनिधि ने वकीलों के जख्मों पर मरहम लगाने की जहमत नहीं उठाई। मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा, लेकिन वह नहीं मिला। इससे लगता है कि सरकार वकीलों के प्रति संवेदनहीन है। इस बेरुखी के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन चलेगा। 16 सितंबर को सभी जिला मुख्यालयों, ट्रेजरी और रजिस्ट्री कार्यालयों पर धरना देंगे।
पुलिस उत्पीड़न के खिलाफ 22 सितंबर को काला फीता बांध कर काम करेंगे, जबकि 29 सितंबर को प्रदेश भर में सरकार का पुतला फूंका जाएगा। छह अक्तूबर को मंडलवार और 13 अक्तूबर को बार कौंसिल के कार्यालय में प्रदेश के सभी बार संघों के पदाधिकारियों का सम्मेलन होगा। 20 अक्तूबर को प्रदेशभर के अधिवक्ता विधानसभा का घेराव करेंगे।
चार जजों की कमेटी ने आसान की काम पर लौटने की राह
हापुड़ में लाठीचार्ज से आक्रोशित वकीलों को न्यायिक कार्य के लिए राजी करना आसान नहीं था। सोशल मीडिया पर वायरल हुईं पुलिस की बर्बर तस्वीरें शांत होने की कोशिशों को नाकाम कर देती थीं। मगर, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर ने एक अभिभावक रूप में कभी अधिवक्ताओं को समझाया तो कभी दो-टूक चेताया भी।
आंदोलनरत वकीलों की मांगों की लंबी सूची देखकर आखिरकार उन्होंने सात सितंबर को हाईकोर्ट के चार जजों की एक कमेटी बनाई, जो यह देखे कि उनकी कितनी मांगें तुरंत मानने लायक हैं और कितनी में जांच के बाद। न्यायमूर्ति अजीत कुमार, न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति समित गोपाल को समिति में रखा गया। समिति ने सारी मांगों को छह बिंदुओं में समेट दिया। कई मांगें मान ली गईं और बार कौंसिल भी संतुष्ट हो गई।