ट्रेनों के संचालन में मानवीय भूलों पर अंकुश लगाने, सतर्कता बढ़ाने और संरक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए रेलवे बोर्ड ने ट्रेन मैनेजरों (गार्ड) के रिफ्रेशर प्रशिक्षण में बड़ा नीतिगत बदलाव किया है।
ट्रेनों के संचालन में मानवीय भूलों पर अंकुश लगाने, सतर्कता बढ़ाने और संरक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए रेलवे बोर्ड ने ट्रेन मैनेजरों (गार्ड) के रिफ्रेशर प्रशिक्षण में बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। काकोदकर समिति की सिफारिशों के आधार पर अब कोर्स के बाद पारंपरिक ‘पास या फेल’ की परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसकी जगह अब अंकों के आधार पर पारदर्शी ग्रेडिंग प्रणाली लागू की गई है।
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नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों के प्रदर्शन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें 80 या उससे अधिक अंक पाने वालों को ‘ए’ ग्रेड, 60 से 80 के बीच अंक पाने वालों को ‘बी’ ग्रेड और 60 से कम अंक पाने वाले कर्मचारियों को ‘सी’ ग्रेड दिया जाएगा। ‘बी’ ग्रेड पाने वाले कर्मियों की लॉबी स्तर पर नियमित काउंसलिंग होगी, जबकि ‘सी’ ग्रेड पाने वालों को मंडल स्तर पर विशेष निगरानी में रखकर संरक्षा सेमिनार और अभियानों में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के इस कदम से ट्रेन मैनेजरों की कार्यकुशलता में सुधार और कमियों की सटीक पहचान करने में मदद मिलेगी।