सार
कैंसर की जटिल सर्जरी हो या किडनी ट्रांसप्लांट, ऑपरेशन के बाद मरीज को लंबे समय तक दर्द से राहत देना चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौती होती है। आधुनिक एनेस्थीसिया तकनीक में ट्रांसडर्मल पैच इस चुनौती को आसान बना रहे हैं। त्वचा पर लगाए जाने वाले इन पैच के जरिए दवा धीरे-धीरे शरीर में पहुंचती है और मरीज को कई दिनों तक दर्द से राहत देने में मदद करती है। एसआरएन अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट और कैंसर सर्जरी के मरीजों के दर्द प्रबंधन में इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
कैंसर व किडनी ट्रांसप्लांट की सर्जरी के बाद मरीज के दर्द को लंबे समय तक नियंत्रित करना चिकित्सक के लिए काफी कठिन होता है। एनेस्थीसिया के बदलते स्वरूप में इसे काफी आसान बना दिया है। अब ऐसे असहनीय दर्द को नियंत्रित करने के लिए त्वचा में एक पैच लगा दिया जाता है। जो सात से आठ दिन तक मरीज के दर्द को नियंत्रित रखता है। संवाद
आठ घंटे चला किडनी ट्रांसप्लांट
एसआरएन अस्पताल में इस साल दो मरीजों का गुर्दा प्रत्यारोपण हो चुका है। मरीज को सटीक एनेस्थीसिया के जरिये अचेत करना व उसके दर्द को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती थी। करीब चार घंटे चली सर्जरी के बाद मरीज को चार घंटे अतिरिक्त अचेत अवस्था में रखा गया। वहीं, आईसीयू से निकलने के बाद मरीज की त्वचा में पैच लगाकर एक हफ्ते दर्द को नियंत्रित किया गया।
कैंसर के असहनीय दर्द से भी आराम
एसआरएन अस्पताल में 20 सितंबर को मुंह के कैंसर से पीड़ित 60 वर्षीय मरीज की सर्जरी की गई। इस दौरान मरीज के जबड़े को काटकर कैंसर का भाग हटाया गया। जिसके बाद मरीज के पैर की हड्डी व मांस को लेकर चेहरे को जोड़ा गया। ऐसे में मरीज के दर्द को एक हफ्ते तक पैच लगाकर नियंत्रित किया गया।
एनेस्थीसिया में पैच का महत्व
एनेस्थीसिया और दर्द प्रबंधन में पैच (ट्रांसडर्मल पैच) का मुख्य रोल सर्जरी के बाद व किसी प्रक्रिया के दौरान मरीज को लगातार और बिना सुई लगाए दर्द से राहत देना होता है। इन पैच को त्वचा पर चिपकाया जाता है, जिससे दवा धीरे-धीरे त्वचा के रास्ते सीधे खून में पहुंचती है।
जटिल सर्जरी के बाद मरीज को लंबे समय तक असहनीय दर्द से राहत दिलाने के लिए पैच का इस्तेमाल किया जाता है। वैसे समय के साथ एनेस्थीसिया देने के तरीकों के काफी बदलाव आया है।
-डॉ. धर्मेंद्र कुमार यादव, एसोसिएट प्रोफेसर, एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर विभाग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज।