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दूसरी शादी के लिए धर्म परिवर्तन करना अवैध: हाईकोर्ट

Thu, 21 Sep 2017 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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delhi court
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हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि शादीशुदा व्यक्ति द्वारा धर्मपरिवर्तन कर दूसरी शादी करना अवैध है। ऐसे विवाह की कानून की नजर में कोई मान्यता नहीं है। पहली शादी से तलाक हुए बिना दूसरी शादी करना भी गैरकानूनी है। ऐसा विवाह शून्य और अवैध माना जाएगा। कोर्ट ने जौनपुर की विवाहित महिला द्वारा दूसरे धर्म के पुरुष से विवाह करने के लिए धर्म परिवर्तन करने और फिर शादी कर लेने के मामले में कोई भी राहत देने से इंकार कर दिया है। अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग भी खारिज कर दी है।
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जौनपुर की खुशबू बेगम उर्फ खुशबू तिवारी और उसके कथित पति अशरफ की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने यह आदेश दिया। याचिका के मुताबिक खुशबू तिवारी की पहली शादी 30 नवंबर 2016 को हुई थी। इस बीच वह अशरफ के संपर्क में आई और पहली शादी से तलाक लिए बिना उसने धर्मपरिवर्तन कर जौनपुर के बरसठी थाने के जमुनीपुर गांव निवासी अशरफ से शादी कर ली। अपना नाम भी बदल कर खुशबू बेगम कर लिया।

दोनों ने याचिका दाखिल कर कहा कि वह बालिग हैं और अपनी मर्जी से विवाह किया है। उनकी शादी से घर वाले खुश नहीं हैं इसलिए उनकी जान को खतरा है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची पहले से शादीशुदा है। सिर्फ दूसरी शादी के लिए उसने धर्म परिवर्तन किया गया है। याचिका का विरोध कर रहे अधिवक्ता विनोद मिश्र ने कहा कि दोनों के खिलाफ जौनपुर में एनसीआर दर्ज है। कोर्ट ने नूरजहां बेगम उर्फ अंजलि मिश्रा के केस का हवाला देते हुए याचीगण की शादी को शून्य करार दे दिया और उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है।
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