यह उपकरण वहां मिलने वाले पत्थरों, मिट्टी, गैस आदि का अध्ययन करेगा। इससे पता चल सकेगा कि चांद पर जीवन की कितनी संभावनाएं हैं। यह उपकरण मून क्विक्स के बारे में भी बताएगा, जिसे हम पृथ्वी पर भूंकप कहते हैं। अगर यह उपकरण हीलियम गैस का भंडार खोज लेता है तो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के लिए यह सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
प्रो. जेके पति ने बताया कि कि इस चंद्रयान तृतीय के दो मुख्य उद्देश्य हैं। पहला वैज्ञानिक उद्देश्य और दूसरा तकनीकी उद्देश्य। चंद्रयान द्वितीय के मुकाबले चंद्रयान तृतीय के वैज्ञानिक उद्देश्य में तो बहुत परिवर्तन नहीं किए गए हैं, लेकिन तकनीकी उद्देश्य को देखें तो कई परिवर्तन हुए हैं। पिछली बार पांच बूस्टर लगाए गए थे। इस बार बेहतर संतुलन के लिए चार बूस्टर लगाए गए हैं।
चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग के बाद भविष्य में न सिर्फ चांद, बल्कि मंगल गृह पर भी सैंपल रिटर्न मिशन पर काम हो सकेगा। एक बार सॉफ्ट लैंडिंग हुई तो भविष्य में बेहतर तकनीक के साथ चांद और मंगल गृह पर मिशन को आसान बनाया जाएगा।