लखनऊ के एक निजी विश्वविद्यालय के चांसलर और कुलसचिव पर युवती को नौकरी का झांसा देकर रेप करने का आरोप है। पीड़िता ने न्याय के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। कोर्ट ने एसएसपी इलाहाबाद को आदेश दिया है कि वह अपनी निगरानी में जांच कराएं। याचिका पर न्यायमूर्ति वीके नारायण और न्यायमूर्ति शशिकांत की खंडपीठ ने सुनवाई की।
याची की अधिवक्ता प्रज्ञा पांडेय के अनुसार महर्षि आईटी विश्वविद्यालय के चांसलर अजय प्रकाश श्रीवास्तव, सुपरवाइजर अनूप श्रीवास्तव और उप कुलसचिव विजय ने उसे नौकरी दिलाने का आश्वासन देकर इलाहाबाद बुलाया था। 27 फरवरी 2016 को उन्होंने उसे नशीला पदार्थ खिलाकर रेप किया और चलती कार से आधी रात को धूमनगंज थानाक्षेत्र में फेंक कर चले गए। पीड़िता ने स्वयं स्वरूपरानी अस्पताल जाकर अपना इलाज कराया। इसकी प्राथमिकी धूमनगंज थाने में दर्ज कराई गई है। उसका मेडिकल परीक्षण और पुलिस के समक्ष बयान दर्ज हो चुका है। कोर्ट में भी पीड़िता ने बयान दर्ज कराया है। इसके बावजूद पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं कर रही है। कोर्ट ने एसएसपी इलाहाबाद को निर्देश दिया है कि वह जांच कार्य की स्वयं निगरानी करें तथा यह सुनिश्चित करें कि जांच निष्पक्ष और समय सीमा के भीतर पूरी हो जाए।