नवरात्रि के पांचवें दिन शहर के प्रमुख देवी मंदिर शक्ति पीठ ललिता देवी, कल्याणी देवी और अलोपशंकरी के अलावा अन्य देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ रही। भोर में मंगला आरती के बाद शुरू हुआ दर्शन पूजन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।
चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता के स्वरूप की पूजा और आराधना की गई। देवी को सुगंधित पुष्प के साथ नैवेद्य और मिष्ठान आदि का भोग लगाकर आरती की गई। शक्तिपीठ कल्याणी देवी, ललिता देवी और अलोप शंकरी के अलावा सभी देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार लगी रही। भोर में साढ़े चार बजे मंगला आरती के बाद दर्शन पूजन का सिलसिला शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा। मंदिरों के बाहर नारियल, चुनरी प्रसाद के दुकान पर लोगों ने फूल माला लेकर देवी को अर्पित किया।
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चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण देवी के इस पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। आप तस्वीर में देख सकते हैं कि, सिंह पर सवार मां स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं। वो अपनी ऊपर वाली दांयी भुजा में बाल कार्तिकेय को गोद में उठाए उठाए हुए हैं, नीचे वाली दांयी भुजा में कमल पुष्प लिए हुए हैं, ऊपर वाली बाईं भुजा से माता रानी ने जगत तारण वरद मुद्रा बना रखी है व नीचे वाली बाईं भुजा में कमल पुष्प है। उनके इस रूप को देखकर काफी शांति मिलती है।
नवरात्रि के पांचवें दिन बुद्धि और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता के विधि विधान से पूजन करने से संतान का सुख प्राप्त होता है। श्रद्धालुओं ने माता की प्रतिमा को नारियल चुनरी चढ़ाकर सुख शांति की कामना की। सुबह से ही मंदिर में पूजा अर्चना के लिए लंबी कतार लग गई थी। सभी श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक दर्शन किए। श्रद्धालुओं ने कतार में खड़े खड़े माता रानी के जयघोष लगाए, जिससे मंदिर गूंज उठे। बड़ी देवी मंदिर के पुजारी विनायक भारद्वाज ने कहा कि मां कुष्मांडा की महिमा अद्वितीय है।