नवरात्रि के दूसरे दिन मां भगवती के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी देवी की आराधना की गई। घरों में कलश पूजन के साथ ही दुर्गा सप्तशती पाठ किया गया। आदिशक्ति के मंदिरों ललिता देवी, कल्याणी देवी और अलोपशंकरी मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ रही।
नवरात्रि के दूसरे दिन मां भगवती के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी देवी की आराधना की गई। घरों में कलश पूजन के साथ ही दुर्गा सप्तशती पाठ किया गया। आदिशक्ति के मंदिरों ललिता देवी, कल्याणी देवी और अलोपशंकरी मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ रही। विल्व निमंत्रण और आह्वान के साथ ही अखंड ज्योति जलाकर सनातनधर्मियों ने कहीं दुर्गा शप्तसती तो कहीं सहस्त्रनाम के पाठ शुरू किए। घरों से लेकर देवी मंदिरों तक नवरात्र की आराधना के लिए भक्तों का उत्साह देखने लायक रहा। मंदिरों में घंटे-घडिय़ाल के साथ दिन भर मंत्रोच्चार गूंजते रहे।
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चैत्र की द्वतीयापर देवी के दूसरे स्वरूप की आराधना की गई। अधिकतर सनातनी परिवारों में कलश स्थापना होने की वजह से कई पुरोहितों को तीन से चार यजमानों के यहां मां दुर्गा का आह्वान कराना पड़ा। मीरापुर की मोहिनी तिवारी ने पुत्री की शादी और पुत्र के लिए अच्छी नौकरी के लिए नौ दिन का व्रत रखकर कलश स्थापना की गई है।
भय बाधा से मुक्ति के लिए नवरात्र के अनुष्ठानों की इस बार होड़ मची रही। सुबह ही फूलों, रंगोलियों और तरह-तरह के हल्दी-चंदन के स्वास्तिक और ऊं के प्रतीकों से सजी वेदियों पर कलश स्थापना आरंभ हुई। गंगा की रेत से तैयार वेदियों पर मंगल कामना के जौ उगाए गए। इसी के साथ कलश में गंगा का जल, चांदी-तांबे का सिक्का और सुपारी के रूप में मां दुर्गा का आह्वान किया गया।
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कलश के ऊपर नारियल सजाए गए। मां को लाल चुनरी और तरह-तरह का भोग अर्पित किया गया। मीरापुर में मां ललिता देवी और कल्याणी देवी में मां कल्याणी देवी की झांकियां शैलपुत्री के रूप में सजाई गईं। अलोपशंकर देवी के दरबार में भी देर रात तक दर्शन के लिए तांता लगा रहा।