सूर्योदय के साथ ही ब्रह्म मुहूर्त में ही कलश स्थापना कर दुर्गा शप्तसती और दुर्गा चालीसा पाठ आरंभ हो जाएंगे। इसके लिए घरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सविधि मंत्रों से मां का आह्वान कर कलश स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही पुष्प, सुगंध और माला अर्पित कर मां का ध्यान किया जाएगा। सिद्धपीठ मां ललिता देवी के पुजारी शिवमूरत मिश्र के मुताबिक इस नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना में महामारी से मुक्ति के लिए विशेष मंत्रों से आह्वान किया जाएगा।
ऐसे करें कलश स्थापना
कोरोना काल में मां दुर्गा जल्द उठकर स्नान कर स्वच्छ कपड़े धारण करें। फिर आसन, लाल वस्त्र, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और पुष्पांजलि से मां दुर्गा का आह्वान करें। सबसे पहले गौरी , गणेश और नवग्रह की पूजा कर मां का आह्वान कर कलश स्थापना करें। घट स्थापना के लिए मिट्टी की वेदियां बनाकर जौ की बोवाई करें। इसके बाद अखंड दीप जलाकर मनोवांछित कामना की पूर्ति के लिए करें मां की नौ दिवसीय आराधना आरंभ करनी चाहिए। ज्योतिषाचार्य पं ब्रजेंद्र मिश्र के मुताबिक इस कोरोना महामारी से बचने और इसके संपूर्ण खात्मे के लिए मां की आराधना से सहज कोई उपाय नहीं है। इस नवरात्र में भक्तों को अपनी क्षमता के अनुसार मां को पुष्प, फल और उनके प्रिय भोग अर्पित कर आराधना करनी चाहिए। किसी भी तरह के भय से मुक्ति के लिए दुर्गा शप्तसती के पाठ और अखंड दीप जलाकर कर मां का ध्यान करना फलदायी रहेगा। पालनहारिणी मां दुर्गा की नौ दिवसीय उपासना के फलित इस बार शुभ और मंगलकारी हैं।