करारी में चहेल्लुम का जुलूस निकालते अकीदतमंद।
- फोटो : amar ujala
रसूले अकरम के नवासे इमाम हुसैन के चेहल्लुम पर जिले के सभी इमामबाड़ों में मजलिस और मातम का दौर चला। अजादार ताजिये उठाकर कर्बला ले गए और नम आंखों से दफन करते हुए आंसू बहाए।
शुक्रवार को जिले में इमाम हुसैन का चेहल्लुम अकीदत व एहतराम के साथ मनाया गया। जिले के मंझनपुर, करारी, दारानगर, चायल, भरवारी, मुस्तफाबाद सहित कई जगह इमाम के चेहल्लुम पर सुबह से ही अजाखानों में इमाम के चाहने वाले पहुंच कर शहादत सुन आंसू बहा रहे थे।
मौलानाओं ने तकरीर कर इमाम के मसायब बयान किए। करारी स्थित चमनगंज के चौधरी कादिर अली के इमाम बारगाह में मजलिस हुई। इसे मौलाना जमीर हैदर ने खिताब करते हुए कहा कि इमाम हुसैन की शहादत के बाद अहले हरम को कैद कर लिया गया। जब इमाम की बहन जनाबे जैनब और बेटी सकीना इमाम पर रोना चाहती थीं तो यजीदी फौज कोड़े लगाकर मना करती थी। इस दौरान कैदखाने में सकीना को मौत आ गई। मजलिस के बाद अलम, जुलजनाह और अमारी बरामद हुई।
अजीज हुसैन नकी हसन और खुर्शीद अब्बास ने मर्सिया पढ़ा- मां जाई है जैनब दुख पाई है जैनब, ऐ लाश ए बेसर तेरा सर लाई है जैनब। इसके बाद नवजवान मातम करते हुये कर्बला पहुंचे और अजादारों ने ताजिये दफन किए। इसी तरह औरेनी गांव में चेहल्लुम का जुलूस निकाला गया। इस मौके पर मेले का भी आयोजन किया गया जहां लोगों ने खरीदारी की।