केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से छात्रों में क्रियात्मक गतिविधियों के विकास के लिए सतत और समग्र मूल्यांकन (सीसीई) व्यवस्था लागू की गई थी। 2009-10 में सीबीएसई की ओर से लागू सीसीई व्यवस्था वर्तमान समय में छात्रों एवं अभिभावकों की परेशानी बन गई है। इससे छात्रों का शैक्षिक विकास कम उनकी परेशानी अधिक बढ़ रही है। छात्रों को प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए पूरे परिवार का सहारा लेने केबाद भी काम पूरा नहीं हो रहा है। गर्मी की छुट्टी के दौरान स्कूल वालों की ओर से मनमाने तरीके से होमवर्क एवं सीसीई के तहत प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए कह दिया गया है।
स्कूल बंद होने के साथ अभिभावक एवं बच्चे प्रोजेक्ट की तैयारी में जुट गए हैं। अभिभावक बच्चों के प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए परेशान हैं, वह प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए रेडीमेड दुकानदारों से संपर्क कर रहे हैं। केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद से उम्मीद लगाई जा रही थी कि सीबीएसई स्कूलों की ओर से जारी व्यवस्था में बदलाव होगा। सरकार के गठन के दो वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक मानव संसाधन विकास मंत्री की ओर से सीसीई से भी छूट नहीं मिल सकी है। यह व्यवस्था छात्रों की जानकारी बढ़ाने वाली कम बल्कि परेशानी बढ़ाने वाली हो गई है। इस व्यवस्था के बारे में कई बार शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों की राय जानने के बाद भी सरकार की ओर से कोई बदलाव नहीं किया गया।
पूर्व शिक्षाधिकारी राज सिंह का कहना है कि सीसीई का मतलब यह नहीं है कि होम वर्क अधिक हो बल्कि लर्निंग प्रोसेस को स्टूडेंट फ्रेंडली बनाना है। उनका कहना है कि कुछ स्कूलों में प्रोजेक्ट वर्क का प्रेशर स्टूडेंट पर बढ़ता जा रहा है, घर पर प्रोजेक्ट बनाने को कहा जाता है और स्टूडेंट दुकानों से रेडीमेड प्रोजेक्ट लेकर आते हैं या अभिभावकों से बनाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि सीसीई में साफ कहा गया है कि टीचर्स की निगरानी में स्कूल में ही प्रोजेक्ट वर्क होना चाहिए। स्कूलों में ऐसे प्रोजेक्ट बनाने को कह दिया जाता है जो विद्यार्थी की समझ से परे होता है।