प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ओर से भर्ती परीक्षाओं में सुधार के लिए तमाम निर्णय लिए गए थे। सीबीआई अब इन सुधारों के पीछे छिपी जड़ें तलाशने में लगी है। सीबीआई की टीम ने इस दिशा में भी जांच तेज कर दी है। पड़ताल की जा रही है कि आयोग को अचानक सुधार के लिए ढेर सारे निर्णय एक साथ क्यों लेने पड़े। आयोग को मालूम था कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है तो आयोग इतने दिनों तक क्या करता रहा।
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई के पास भर्ती परीक्षाओं में धांधली से जुड़ी कई शिकायतें आ चुकी हैं और टीम ने अलग-अलग दिशा में अपनी जांच तेज कर दी है। सीबीआई की नजर आयोग के उन निर्णयों पर है, जो पीसीएस-2015 में हुई गड़बड़ियों के बाद लिए गए। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद सीबीआई जांच की मांग ने तेजी पकड़ ली। सरकार जांच की घोषणा करती, इससे पहले आयोग ने सुधार को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर दिए। पीसीएस मुख्य परीक्षा-2015 में कॉपी का कोड नंबर बदले जाने का मामला सामने आया था। साथ ही प्रारंभिक परीक्षा का एक पेपर आउट हुआ था। इसके अलावा पीसीएस-2014 और उसके पहले की परीक्षाओं की कॉपियों को नष्ट किए जाने के मामले में भी आयोग चौतरफा विवादों से घिर गया था।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही कटघरे में खड़े आयोग ने सुधार के लिए तमाम महत्वपूर्ण निर्णय लिए। मुख्य परीक्षा की कॉपियों में बार कोड की व्यवस्था लागू करने का फैसला हुआ ताकि कोड नंबर या कॉपी बदलने की घटना न हो। पेपर आउट न हो, सो निर्णय लिया गया था कि पेपर के बंडल सीसीटीवी या वीडियो कैमरों के सामने ही खोले एवं सील किए जाएंगे। इसके अलावा आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया था कि मुख्य परीक्षा की कॉपियों को स्कैन किया जाएगा और उन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। ऐसे में कॉपियां नष्ट किए जाने के बाद भी रिकार्ड पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगे। इनमें से ज्यादातर निर्णय लागू कर दिए गए जबकि कॉपियों को स्कैन किए जाने की प्रक्रिया को लागू किए जाने के लिए बजट का इंतजार है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने इस दिशा में भी जांच शुरू कर दी है। आयोग ने अगर सुधार के लिए अचानक इतने निर्णय एक साथ लिए तो इस मतलब है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी हो रही थी। सीबीआई यह तथ्य भी खंगाल रही है कि इन गड़बड़ियों के पीछे किन लोगों का हाथ था।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में लगातार आठवें दिन बृहस्पतिवार को भी सीबीआई की फोरेंसिक टीम ने अपनी जांच जारी रखी। हालांकि कंप्यूटरों की स्कैनिंग की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। यह प्रक्रिया पूरी होते ही सीबीआई आयोग के कंप्यूटरों प्राप्त संदिग्ध डाटा का विश्लेषण करेगी और उस आधार पर जांच आगे बढ़ाएगी।
प्रतियोगियों ने सीबीआई को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के दो संदिग्ध कर्मचारियों के नाम दिए हैं। प्रतियोगियों ने सीबीआई को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि अनिल यादव के कार्यक्रम के दौरान साक्षात्कार में सदस्यों से कहा गया था कि पेंसिल से लिखकर नंबर दें। प्रतियोगियों ने सीबीआई को उस कर्मचारी का नाम दिया है जो बाद में पेंसिल से लिखे नंबरों को मिटाकर बदल देता था। इसके अलावा एक अन्य कर्मचारी का नाम भी सीबीआई को दिया गया है, जिस पर आरोप लगाया गया है कि वह कंप्यूटरों में फीड नंबरों के साथ छेड़छाड़ करता था।