करीब 26 साल से लंबित पेेंशन और एरियर की मंजूरी के लिए नीरज कुमार उनसे 30 हजार रुपये रिश्वत मांग रहा था। उसने इंडियन बैंक में क्लर्क अपने मित्र पंकज बिष्ट के लखनऊ के विराज खंड ब्रांच स्थित खाते का नंबर देकर उसमें रिश्वत की रकम जमा करने को कहा। जैसे ही मेजर की पुत्री ने क्लर्क के खाते में 20 हजार रुपये ट्रांसफर किए, सीबीआई ने आर्मी इंटेलिजेंस यूनिट की मदद से नीरज कुमार को दबोच लिया। जांच में सामने आया कि क्लर्क पंकज बिष्ट ने नीरज कुमार के साथ बीटेक किया था। उसे अपने खाते मेंं रिश्वत की रकम आने की कोई जानकारी नहीं थी, जिसकी वजह से सीबीआई ने उसे गिरफ्तार नहींं किया है।
मेरठ में भी दोस्त के खाते में ली थी रिश्वत
सीबीआई ने दो वर्ष पूर्व मेरठ मेंं भी इसी तरह पीसीडीए के ऑडिटर आशुतोष यादव को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। उसने भी अपने दोस्त के बैंक खाते मेंं रिश्वत ली थी। सीबीआई के अधिकारियों के मुताबिक पीसीडीए के कुछ कर्मचारी रिश्वत लेने के लिए यही तरीका अपना रहे हैं जिससे वे आसानी से जांच एजेंसियों की नजर में नहीं आते हैं।