इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में अधिवक्ता की मां को कथित रूप से गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि एसआरएन अस्पताल के प्रिंसिपल वीके पांडेय की ओर से हस्ताक्षरित सभी रिकॉर्ड के मूल दस्तावेज अगली सुनवाई 28 जनवरी को न्यायालय में प्रस्तुत किए जाएं। साथ ही राज्य सरकार की ओर से दाखिल किए गए सभी कागजात सीलबंद लिफाफे में कोर्ट की कस्टडी में रखे जाएंगे। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ आनंद की खंडपीठ ने दिया है।
अधिवक्ता सौरभ सिंह सोमवंशी ने याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि सर्जरी के दौरान उनकी मां को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाया गया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। उनका कहना है कि यह घटना अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ की गंभीर लापरवाही का परिणाम है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से दाखिल 43 पन्नों के जवाब में कहा गया कि चार दिसंबर को उस नाम की किसी महिला को ब्लड नहीं दिया गया। इस पर याची पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रीना एन सिंह और राणा सिंह ने दस्तावेज पेश किया, जिसके तहत चार दिसंबर को दोपहर तीन बजे याची की मां को ब्लड जारी किया गया था। एक घंटे चली बहस के बाद कोर्ट ने इलाज से संबंधित सभी दस्तावेज याची को उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।