दुष्कर्म पीड़िता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और चार्जशीट लगाने के मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर और दरोगा के खिलाफ रिपोर्ट भेजी गई है। दरअसल असिस्टेंट प्रोफेसर ने पीड़िता के खिलाफ कालेज में घुसकर मारपीट और धमकी देने का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने इसी मामले में पीड़िता के खिलाफ चार्जशीट लगा दी थी। एसपी सिटी ने इस मामले की जांच की और इंस्पेक्टर व दरोगा के खिलाफ रिपोर्ट भेज दी।
दुष्कर्म केस में गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के मामले की जांच शुरू हुई तो कई पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई हो गई थी। इस मामले में सर्विलांस प्रभारी संजय सिंह यादव, हंडिया इंस्पेक्टर बृजेश सिंह और नारकोटिक्स प्रभारी महावीर सिंह हटाकर जोनल दंगा नियंत्रण इकाई में तैनात कर दिया गया था। दरअसल तीनों की मिलीभगत से दुष्कर्म केस के गवाह को फर्जी मामले में जेल भेज दिया गया था। इस पूरे मामले की जांच एसपी गंगापार अभिषेक अग्रवाल को सौंपी गई थी।
पीड़िता ने यह भी शिकायत की थी कि उसके खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता ने कालेज में घुसकर असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ मारपीट और धमकी दी थी। विवेचना दरोगा बलवंत यादव ने की थी। इंस्पेक्टर शिशुपाल शर्मा ने विवेचना को एप्रूव करते हुए चार्जशीट लगा दी थी। एसपी सिटी ने पूरे मामले की जांच और पाया कि विवेचना और चार्जशीट के दौरान तमाम खामियां थीं। तमाम बातों को नजरंदाज कर चार्जशीट दाखिल की गई थी। बलवंत और शिशुपाल के खिलाफ डीआईजी को रिपोर्ट सौंपी गई है। जल्द ही दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।