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यूपीपीएससी के खिलाफ कैंडल मार्च, एक छात्रनेता गिरफ्तार

Tue, 04 Jun 2019 01:14 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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uppsc - फोटो : प्रयागराज
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भर्ती में भ्रष्टाचार के खिलाफ सोमवार को कैंडल मार्च निकालने से पहले ही आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष कौशल सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि कौशल की गिरफ्तारी के बाद भी प्रतियोगी छात्रों ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन से चंद्रशेखर आजाद पार्क तक कैंडल मार्च निकाला और पेपर लीक मामले मेें उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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प्रतियोगी छात्र भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के तहत कैंडल मार्च निकालने के लिए शाम साढ़े पांच बजे छात्रसंघ भवन के सामने इकट्ठा हुए थे लेकिन, शुरुआत होने से पहले ही कर्नलगंज पुलिस मोर्चा अध्यक्ष कौशल सिंह को गिरफ्तार कर लिया। इस पर वहां हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई लेकिन बड़ी संख्या में फोर्स की तैनाती के कारण छात्रों को पीछे हटना पड़ा। कौशल को 31 मई को यूपीपीएससी के सामने हुई बवाल में सिविल लाइंस थाने की पुलिस ने नामजद किया था। कौशल की गिरफ्तारी इसी मामले मेें की गई है।

फिलहाल आयोग के खिलाफ जारी अलग-अलग आंदोलनों का नेतृत्व कर रहे सभी छात्र नेता अब जेल में है। इनमें छात्रसंघ अध्यक्ष उदय प्रकाश यादव भी शामिल हैं। हालांकि कैंडल मार्च में शामिल छात्र सरकार की ओर से अब तक की गई कार्रवाई से संतुष्ट नजर आए लेकिन उनकी मांग है कि सचिव समेत अन्य दोषी अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। साथ ही परीक्षा नियंत्रक के समर्थन में आयोग के कर्मचारी-अधिकारी संघ के अध्यक्ष दिनेश कुमार के नेतृत्व में जारी धरने में शामिल कर्मचारियों की जांच कराई जाए। कैंडल मार्च में मनोज सिंह, हर्षवर्धन पाठक, प्रतिमा सिंह, प्रतिभा सिंह, रितेश तिवारी आदि शामिल रहे।
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एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में छात्र परीक्षा निरस्त किए जाने की मांग पर अड़े हैं। इस मुद्दे पर छात्रों ने सोमवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सामने बांह और मुंह पर काली पट्टी बांधकर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के विरोध में प्रदर्शन किया और प्रदेश सरकार का पुतला फूंका।

छात्रों ने मांग की कि भर्ती में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आयोग की कार्यकारिणी को भंग करते हुए सचिव की गिरफ्तारी भी की जाएगी। साथ ही आंदोलन करने पर गिरफ्तार किए गए छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए। भ्रटाचार और अनियमितता की सीबीआई जांच कराई जाए। छात्रों ने कहा कि मांगें पूरी होने तक वे चुप नहीं बैठेंगे और फिर से यूपीपीएससी का घेराव करेंगे। प्रदर्शन में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अविनीश यादव समेत छात्र नेता शिवबली यादव, विकास तिवारी, अविनाश विद्यार्थी, राहुल क्रांति, राकेश पासवान, महफूज खान, राहित बैरागी, अंकित यादव, प्रशंत सिंह, अजय सम्राट, रोहित किसान, जितेंद्र धनराज, रवि पाल, प्रभात, अरुण, अनिलेत आदि शामिल रहे।

uppsc - फोटो : प्रयागराज
एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी करने वाले मजीदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज के शिक्षक एवं युवा कवि इमरान खान पामाल का दावा है कि एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में व्यापक पैमाने पर धांधली की गई।

इमरान के मुताबिक ड्यूटी के दौरान उन्होंने कुछ छात्रों को आपस में बात करते सुना कि जो सवाल नहीं आ रहा है, उसे छोड़ दें। ओएमआर शीट को खाली छोड़ दें। आयोग में सेटिंग हो गई है। बाद में ओएमआर पर सही जवाब भर दिया जाएगा। इमरान के मुताबिक उन्होंने संस्कृत, गृह विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान विषय की परीक्षा में ड्यूटी गई। कुछ अभ्यर्थी तो ऐसे दिखे, जिन्होंने केवल 10 से 12 प्रश्न ही हल किए और बाकी ओएमआर को ब्लैंक छोड़ दिया। 
 
हालांकि इमरान के इस दावे को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। परीक्षा में माइनस मार्किंग भी थी। ऐसे में कोई अभ्यर्थी सवाल न आने पर उसका जवाब देकर अपना नुकसान क्यों करेगा? इसके अलावा ओएमआर की कार्बन कॉपी भी होती है, जो ऑफिस कॉपी के रूप में आयोग में जमा होती है। अगर मूल कॉपी में बाद में कोई छेड़छाड़ होती है तो कॉर्बन कॉपी की जांच से उसे पकड़ा जा सकता है। ऐसे में कोई अफसर या कर्मचारी जाबूझकर इतनी बड़ी गलती क्यों करेगा?
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uppsc - फोटो : प्रयागराज
परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार के समर्थन में धरने पर बैठे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के कर्मचारियों ने भी मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग की है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग कर्मचारी-अधिकारी संघ के बैनर तले सोमवार को भी आयोग में कर्मचारियों का धरना जारी रहा। संघ के अध्यक्ष दिनेश कुमार की ओर से आयोग के अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर कहा गया कि कर्मचारी अपनी मांगें पूरी होने तक धरना जारी रखेंगे लेकिन इस दौरान आयोग के परीक्षा संबंधी अति महत्वपूर्ण कार्यों को करते रहेंगे। अध्यक्ष से मांग की गई कि मामले की जांच हाईकोर्ट के किसी न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली कमेटी या सीबीआई से कराई जाए।
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