काम बंद हो गया था। किसी तरह महीना भर गुजरा। उम्मीद थी कि फिर से फैक्ट्री खुलेगी और जिंदगी पटरी पर आ जाएगी। लेकिन जो हालात हैं उसे देखते हुए घर लौटना ही बेहतर लगा। इसी उम्मीद में 50 हजार में कार बुक कर सैकड़ों किमी दूर से चले आए। लेकिन नजर पड़ी तो करेली में स्वास्थ्य विभाग व पुलिस की टीम ने रोक लिया। अब गांव तो पहुंच गए लेकिन घर नहीं बल्कि क्वारंटीन सेंटर में रहना पड़ रहा है।
यह कहानी है कि फरीदाबाद में फंसे उन लोगों की, जो काम-धंधे के सिलसिले में वहां रह रहे थे। मांडा का रहने वाला महेता व उसका परिवार पिछले दो साल से फरीदाबाद के धीरज नगर में रह रहा था। लॉकडाउन के बाद से फैक्ट्री बंद हो गई। पास जो भी पैसे थे, उससे महीने भर का खर्च चलाया। उम्मीद थी कि फैक्ट्री फिर से चालू होने पर सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन मौजूदा हालत देखकर यह उम्मीद भी जाती रही। ठेकेदार भी कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं है कि दोबारा काम कब शुरू होगा।
ऐसे में घर लौटना ही सबसे बेहतर उपाय सूझा। परिवार के साथ ही मांडा के ही रहने वाले मांडा हाता निवासी पंचराज व प्रमोद कुमार, खीड़ीपुर निवासी मोहम्मद सरवर, मगरोर का राज, मवई गांव के मो. कयूम को भी साथ लिया। फिर 50 हजार में दो कारों की बुकिंग की और तीन दिन का सफर करते हुए कौशांबी के असरावल होते हुए शहर में आ गए।
साथ में मां, पत्नी व बच्चे भी थे। हालांकि करेली में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रोक लिया। पूछताछ के बाद स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मीषम जैदी ने जानकारी एडीएम सिटी को दी तो पुलिस पहुंची। इसके बाद सभी को पुलिस की निगरानी में मांडा भेजा गया और वहां जाकर एक स्कूल में क्वारंटीन कराया गया। डॉ. जैदी ने बताया कि कुल 16 लोगों को क्वारंटीन कराया गया है।