बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध का नाता संगम नगरी से भी रहा है। वह नवें वर्षावास के दौरान संगम तट पर आए और गंगा-यमुना के किनारे धम्म देशना की। उसके बाद वह कौशांबी पहुंचे जहां घोषिताराम विहार में उन्होंने चार महीने प्रवास किया। पुराणों में विष्णु के नवें अवतार के तौर पर वर्णित बुद्ध वैदिक धर्म की जटिलताओं एवं कर्मकांड को दूर करने और धम्म प्रचार के लिए ही प्रयाग आए थे। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार भी बुद्ध ने अपना नवां वर्षावास कौशांबी स्थित घोषिताराम विहार में किया। इससे पहले उन्होंने सामाजिक सहिष्णुता के लिए त्रिवेणी तट पर धम्म देशना की।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर हर्ष कुमार बताते हैं, भगवान बुद्ध ने तत्कालीन कौशांबी स्थित घोषिताराम विहार में चार महीने का प्रवास किया था। इस दौरान वैदिक धर्म की जटिलताओं के विरुद्ध सहज मार्ग यानी मध्यम मार्ग का प्रचार-प्रसार किया। संगठनात्मक ढांचा तैयार करने के लिए बौद्ध संघ की स्थापना भी की। बौद्ध कम्यून इंटरनेशनल के निदेशक जीएस शाक्य कहते हैं, अरैल स्थित सम्राट हर्षवर्द्धन बुद्ध विहार में 108फीट की प्रतिमा की स्थापना के साथ बुद्ध के प्रयाग आगमन की स्मृतियों को संजोया जाएगा।