संवेदनशील मतदान केंद्रों पर बीएसएफ की तैनाती ने इस बार कई दिग्गजों का खेल बिगाड़ दिया। मतदान केंद्रों के अंदर किसी भी नान वोटर को घुसने नहीं दिया गया। गेट पर पर्ची देखकर ही इंट्री दी गई। इसी कारण फर्जी वोटिंग नहीं हो पाई। जिले में सभी संवेदनशील मतदान केेंद्रों का यही हाल था।
बृहस्पतिवार को अधिकांश मतदान केंद्रों पर वोटर पहली बार ये नजारा देख रहे थे। मतदाताओं को पर्ची देखकर ही अंदर जाने दिया जा रहा था। दिग्गजों के घर के पास मतदान केंद्रों पर अक्सर औसत से बहुत ज्यादा वोट पड़ते थे। शहर में चाहे वह चकिया हो या फिर कंधईपुर, नीवा या मुट्ठीगंज। यमुनापार में घटवा, सोनाई, बसही, बरांव, औता, लोहारी, नेवढ़िया और शंकरगढ़ और गंगापार में खपटिहा, रूदापुर और गद्दोपुर इलाकों में भी कमोवेश हर बार यही हाल रहता था।
इन स्थानों के आस पास प्रभावी नेताओं के रहने से अक्सर फर्जी मतदान की शिकायतें आती थीं। इस बार व्यवस्था बदली और सेंट्रल पैरा मिलिट्री फोर्स को जिम्मेदारी दी गई कि गेट पर वे सिर्फ मतदाताओं को ही अंदर जाने की अनुमति देंगे। संवेदनशील मतदान केंद्रों पर बीएसएफ के जवान पर्ची देखकर उन्हीं को इंट्री दे रहे थे, जो वोटर थे। कई मतदान केंद्रों पर बीएसएफ से स्थानीय लोगों की बहस भी हुई, लेकिन बिना पर्ची के किसी को अंदर नहीं जाने दिया गया।
मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के लिए मोबाइल ले जाने पर प्रतिबंध का पोस्टर लगा था। कहीं-कहीं पुलिस ने बेहद सख्ती से इस नियम को लागू किया तो कहीं-कहीं पर ढील दी गई। ईसीसी स्थित आदर्श मतदान केंद्र पर कई लोगों की इस बात को लेकर बीएसएफ के जवानों से विवाद भी हो गया, लेकिन किसी को भी मोबाइल के साथ अंदर नहीं जाने दिया गया। जहां-जहां बीएसएफ की तैनाती नहीं थी, वहां पुलिस वाले इस नियम को लेकर काफी ढीले रहे।