याची का कहना है कि वह अमेठी में अध्यापिका के पद पर कार्यरत है। उसने बीएसए अमेठी से अंतरजनपदीय तबादले की मांग की। कहा, उसके पति दिल्ली पुलिस में अधिकारी हैं। बीएसए ने उसे दस अंक देकर सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद के पास संस्तुति भेजी। सचिव ने याची का बुलंदशहर तबादला कर दिया। किंतु बीएसए बुलंदशहर ने याची के पति को केंद्र सरकार का अधिकारी मानने के फैसले को गलत करार दिया। कहा, बीएसए अमेठी ने दस अंक देकर गलती की है।
कोर्ट ने कहा, एक बीएसए को दूसरे बीएसए तथा परिषद के सचिव के निर्णय पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। तबादले पर अमल न करने का आदेश कानून की दृष्टि में कायम रहने योग्य नहीं है। कोर्ट ने बीएसए बुलंदशहर के आदेश पर रोक लगाते हुए सफाई मांगी है कि किस अधिकार से ऐसा आदेश दिया है।