श्रावण पूर्णिमा पर रविवार को भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन मनाया जाएगा। बहनें भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधेंगी और भाई उन्हें उपहार देंगे। पर्व को लेकर घरों में अजब उत्साह रखा तो खरीदारी को लेकर बाजारों में भी धूम रही। घर में तो बहनें भाइयों को राखी बांधेंगी ही, दूर बसी बहनें भाइयों को राखी बांधने के लिए शनिवार रात तक मायके पहुंचीं तो बहनों से राखी बंधवाने के लिए भाई भी उनके घर को रवाना हुए। पर्व पर कलाइयों पर चमचमाती राखियां बंधवाने के लिए छोटे बच्चों में सबसे ज्यादा उत्साह रहा।
वहीं जिन भाइयों की बहनें दूर बसीं हैं, उन्हें दिन भर डाक या कुरियर वाले का बेसब्री से इंतजार रहा। हालांकि बड़ी संख्या में नेट के माध्यम से भी नेह का नाता जोड़ा गया। बहनों ने भाइयों को ऑन लाइन राखियां भेजीं तो भाइयों ने भी उन्हें ऑनलाइन उपहार भेजा। पर्व पर चौक गंगादास स्थित राधाकृष्ण मंदिर, गाड़ीवान टोला स्थित कुंजबिहारी मंदिर सहित दारागंज स्थित ठाकुर हरित माधव मंदिर में ठाकुर जी को राखी बांधी जाएगी।
अबकी कई वर्षो बाद ऐसा संयोग है जब रक्षापर्व भद्रा से मुक्त रहेगा। पूर्णिमा तिथि 25 अगस्त को दिन में 2.16 बजे से आरंभ होकर 26 अगस्त को शाम 4.16 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि में रविवार को रक्षाबंधन मनाया जाएगा और बहनें शाम 4.16 बजे तक राखी बांध सकेंगी।
पर्व के मद्देनजर बहनों ने जमकर राखियां खरीदीं। शनिवार को मीरापुर, चौक, जानसेेनगंज, कटरा, प्रीतमनगर, बहादुरगंज, कीडगंज, खुल्दाबाद, सिविल लाइंस में राखियों की दुकानें कतार में सजीं। दोपहर से पहले तेज बारिश हुई लेकिन दोपहर के बाद इन दुकानों पर रौनक आ गई। चंदन, एडी, गोल्ड, सिल्वर प्लेटेड, रुद्राक्ष, बूटी, जरी, पोत, मोतियों से बनीं राखियां पसंद की गईं। वहीं बच्चों ने ब्रासलेट और म्युजिकल राखियां भी पसंद कीं। अबकी केसरिया धागों और राखियों की धूम रही। पुरानी जीजीआईसी के सामने दुकान लगाए वीरेंद्र, उमेश, आरिफ आदि ने माना कि पूर्व संध्या पर खूब राखियां बिकीं। कहा, ऑनलाइन की धूम है, पर राखी देखकर खरीदने का क्रेज कम नहीं हुआ है। बहनों ने तरह-तरह की राखियों के साथ ही भाभियों के लिए कंगन और चूड़ियों में लटकने वाली खास लुंबा राखियां भी खरीदीं।
रक्षाबंधन पर राखी की तरह ही मिठाइयों की दुकानें सजीं। सिविल लाइंस, कटरा, अशोकनगर, मीरापुर, दारागंज, सुलाकी चौराहा, कीडगंज आदि मोहल्लों में मिठाइयों की दुकानों पर खरीदारी को लोग जुटे। भीड़ से बचने के लिए लोगों ने रात तक मिठाइयां खरीदीं। गली-मोहल्लों की मिठाइयों की छोटी-बड़ी दुकानों को भी पर्व के मद्देनजर थोड़ा आगे बढ़ाकर सजाया गया।