कुंभ के दौरान करोड़ों रुपये की लागत से एडीए की ओर से बनाई गई 33 केवी क्षमता वाली झलवा-करेली की मेन लाइन सोमवार की तड़के खराब हो गई। तीनों फेज की लाइन पर ब्रेक डाउन होने से करेली नौ फीडर बंद हो गए। इससे शहर दक्षिणी-पश्चिमी के तीन दर्जन से अधिक मोहल्लों में बिन बिजली हाहाकार मच गया। बिजली न होने से प्रभावित इलाकों में पानी के लिए भी लोग तरस गए। लूकरगंज हिम्मतगंज समेत कई फीडरों पर ओवरलोडिंग के चलते बिजली की आवाजाही ने लोगों को पस्त कर दिया।
झलवा-करेली 33केवी अंडरग्राउंड लाइन में सुबह फाल्ट आने से ब्रेक डाउन हो गया। सुबह से देर रात तक करेली, अकबरपुर, चकिया समेत कई इलाकों में बिजली नहीं रही। इस वजह से लोग भीषण गर्मी में बेहाल हो गए। इस दौरान पानी के संकट का भी सामना करना पड़ा। सुबह कामकाजी लोगों को नहाने तक के लिए पानी नहीं मिल सका। करेली के आजाद नगर, रहमत नगर, मदारीपुर, शम्स नगर, गौस नगर, मुन्ना मस्जिद, करेली के ए,बी,डी ब्लॉक, काली माई के मंदिर जैसे दर्जन भर से अधिक मोहल्लों में बिजली नहीं रही।
इस दौरान भीषण गर्मी के कारण घरों में बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं का बुरा हाल रहा। इलाके के विनोद, मुन्ना, सलाम, अर्जुन, मनोज, साहिब, सलीम, कलीम का कहना था कि फाल्ट के नाम पर रोज तीन से चार घंटे तक बिजली नहीं दी जा रही है। न जेई का मोबाइल उठता है न सब स्टेशन का फोन। बिजली क्यों गई है और कब आएगी, यह भी बताने वाला कोई नहीं है। इससे लोगों में गुस्सा है। एक्सईएन महेंद्र प्रसाद ने बताया कि झलवा-करेली की लाइन में फाल्ट आ गया है। देर रात एक फेज को चालू करवा लिया गया। आधी रात के बाद आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है।
बेली सब स्टेशन से जुड़ी नया पुरवा फीडर लाइन पर केबल कटने की वजह से सोमवार को ब्रेक डाउन हो गया। इससे नया पुरवा समेत आसपास के इलाकों में घंटों बत्ती गुल रही। ओवरलोडिंग के चलते कई इलाकों में लो बोल्टेज की समस्या से लोगों को जूझना पड़ा।
सुलाकी चौराहे से लगे लक्ष्मण मार्केट के ट्रांसफारमर में सोमवार की शाम आग लगने से अफरा तफरी मच गई। आग की ऊंची लपटें उठने और धुएं का गुबार छा जाने से लोग सकते में आ गए। नागरिकों ने फोन पर फायर बिग्रेड को सूचना दी। दमकल आने के बाद नागरिकों की मदद से आग पर काबू पाया जा सका। ट्रांसफारमर में शाम चार बजे आग लगी। इसके बाद सुलाकी चौराहे से लेकर आसपास के इलाकों की बत्ती गुल हो गई। देर रात तक ट्रांफारमर बदला नहीं जा सका था।